MDH मसाला किंग
December 5, 2020'संवाद' "MDH मसाला किंग" इस दुनिया में नहीं रहे। किंतु किसी व्यंजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए जिस प्रकार से असली-मसाला दुनिया को दे गए, उसी प्रकार से किसी जीवन को भी पुष्ट बनाने के लिए कुछ सद्गुण इस दुनिया में छोड़ गए। वे सद्गुण यदि जिंदगी में मिल जाए तो जिंदगी का स्वाद कुछ और हो जाए। M-Mind,D-Dedication,H-Honesty के अद्भुत मसाले से बना धर्मपाल जी का जीवन सुनने,समझने,अनुकरण करने योग्य और संप्रसारित करने योग्य है। पांचवी क्लास की पढ़ाई छोड़कर 10 साल की उम्र में वे काम करने लगे थे। विभाजन के बाद परिवार को सियालकोट(पाकिस्तान) से भारत आना पड़ा और जिंदगी को नए सिरे से 23 वर्षीय गुलाटी जी को शुरू करना पड़ा।। 15 सौ रुपए लेकर दिल्ली पहुंचे और उसमें से ₹650 का तांगा खरीद कर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास सवारी ढोने लगे। फिर कुछ दिनों के बाद अपना तांगा बेचकर पुश्तैनी मसाले के व्यापार को पुनः प्रारंभ किया। मसाले का स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत की और खुद पर भरोसा इतना कि अपने ब्रांड का प्रचार स्वयं ही करना शुरू किया। शानदार लाल पगड़ी और सफेद शेरवानी पहने हुए चश्मे वाले दादा जी की मुस्कुराती हुई छवि इस बात की गारंटी थी कि व्यंजन कोई भी हो किंतु उनका मसाला उसमें स्वाद,खुशबू और रंगत डाल देगा- असली मसाले सच सच । 97 की उम्र तक प्रत्येक दिन 18 घंटे काम करना और सादा जीवन जीना उन्हें इस मुकाम पर ले आया कि MDHमसाला उद्योग का कारोबार दो हजार करोड़ का हो गया। मसाला किंग महाशय 2017 में FMCG सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले सीईओ थे। अपनी सैलरी का वे 90% हिस्सा दान कर देते थे। अपने 97 वें जन्मदिन पर इसी वर्ष उन्होंने पांच करोड़ रुपए दान किए। वे कहते थे- " पैसे में सुख दो घड़ी का और सेवा में सुख-शांति जिंदगी भर की" "द जॉय ऑफ गिविंग" का मंत्र विद्यार्थियों के जीवन में उतारने के लिए संघर्ष,साहस और समर्पण के मसाले से तैयार ऐसे जिंदादिल लोगों का जीवन नई पीढ़ी के दिलो-दिमाग में बिठाना होगा। आप जब कभी भी किसी व्यंजन में MDH मसाले मिलाएं तो उसी समय पद्म विभूषण से सम्मानित धर्मपाल जी के जीवन को शून्य से शिखर तक पहुंचाने वाले M ind- D edication- H onesty के मसाले वाले मंत्र को भी अपने जीवन में मिलाएं। हार्दिक श्रद्धांजलि -'शिष्य- गुरु संवाद'से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹