'संवाद' " बेटी की इच्छा के अनुसार किसान पिता ने हेलीकॉप्टर में की बेटी की विदाई"- यह खबर पढ़कर और हेलीकॉप्टर में विदाई होती हुई बेटी का चित्र देखकर मन में एक तरफ पिता के प्रति आदर भाव उठ रहा था तो दूसरी तरफ बेटी की अजीबोगरीब इच्छा पर उहापोह चल रहा था। समाचारपत्र ने शीर्षक दिया था- 'लाडो का सपना आखिर हुआ सच।' जिस समाज में बेटियों की भ्रूण-हत्या कर दी जाती है,उस समाज में बेटी की इच्छा का इतना बड़ा मान तो प्रशंसायोग्य है किंतु लाडो का ऐसा सपना अन्य बेटियों को अच्छा संदेश नहीं देगा। यदि सम्यक-शिक्षा से यह सपना तराशा जाता तो पुत्री वर्षा अपनी प्रतिभा के बल पर पायलट बनने का सपना देखती और अपनी मेहनत के बल पर उसे सच करके दिखाती। इससे एक तरफ योग्यता बढ़ाने का समाज को संदेश मिलता और दूसरी तरफ आत्मविश्वास का बेटियों में भाव जगता। वर्षा के पिता दौलत सिंह ने तो अपनी बेटी की ऐसी इच्छा भी पूरी कर दी लेकिन कई बेटियों के पिता पढ़ने की और अपनी प्रतिभा को ऊंचाइयों पर ले जाने की बेटी की जायज आवश्यकता को भी पूरी नहीं करते।। दूसरे की दौलत पर अपने ऐसे सपने को पूरा करने की इच्छा मुझे उचित नहीं लगती चाहे वह बाप की ही दौलत क्यों न हो। नई पीढ़ी का लालन-पालन कुछ ऐसा हो रहा है कि वे अपने सारे शौक मां-बाप के दम पर या अन्य के सहारे पूरा करना चाहते हैं। मेरे शिक्षक सिखाते थे कि मां-बाप या दूसरों का सहारा बहुत अनिवार्य हो तो लो और वह भी कम से कम लो। इससे एक तरफ आत्मविश्वास बढ़ेगा और दूसरी तरफ तुम्हारी संकल्प शक्ति बहुत ऊंचाइयां छू लेगी -


चलो खुद अपनी ताकत पर किसी का साथ मत देखो ,


पैतृक-संपत्ति का भी कभी आस मत देखो।


स्वामी विवेकानंद कहते थे- तुम जो कुछ भी बनना चाहते हो उसका बीज तो तुममें छिपा हुआ है दूसरे से थोड़ा खाद-पानी मिल जाए बस इतनी ही अपेक्षा रखना। आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता सफलता के 2 मूलमंत्र हैं। बस अपनी संकल्प शक्ति जगाओ- 'सर्वं स्वसंकल्पवशात् लघु भवति वा गुरु' अर्थात् अपने संकल्प के अनुसार कोई बड़ा होता है या छोटा। -'शिष्य- गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹