मौत और मुआवजा
December 16, 2020'संवाद' "मौत और मुआवजा" शिक्षालय जाने को निकली 25 वर्षीया शिक्षिका सड़क पर 11के वी विद्युत तार के करंट से जिंदा जल गई-
"क्या पता था जिंदगी खाक में मिलाने गई है ,
मासूम तो कह रही थी कि मां पढ़ाने गई है".
पति जीवनसाथी खो बैठा और मासूम अपनी मां , बहू घर सुना कर गई तो बेटी मां-बाप की आंखों में आंसू भर गई। विद्यार्थी अपनी अध्यापिका को गंवा बैठे तो संगी अपने मिलनसार साथी को। एक इंसान कई प्रकार की भूमिकाओं में रिश्तों को निभा रहा होता है और वे सारे रिश्ते-नाते उसके जाते ही अकेलेपन में तब्दील हो जाते हैं और दर्द से भर जाते हैं। व्यवस्था की लापरवाही के कारण सड़क पर जल कर तड़पती और दम तोड़ती नीलम जी का फोटो हमसे देखा नहीं गया जबकि वे मेरे लिए अनजान थी; अब उन लोगों से कैसे जिया जाएगा जो उनके साथ पल-पल जीते थे।। मुआवजा असली प्रायश्चित नहीं है। अतः शिक्षिका के पति का यह कहना महानता और संवेदनशीलता का परिचय है कि " _मुआवजा नहीं चाहिए बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के कारण जहां पर कम कीमत के उपकरण लगाकर कई जिंदगियों को खतरे में डाल दिया जाता है, उस व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए।"_ यदि व्यवस्था में संवेदनशीलता बची हो तो पत्नी,मां, बहू ,बेटी,शिक्षिका,साथी की अनेक भूमिकाओं को जीने वाली शख्सियत की वास्तविक कीमत समझे। शिक्षिका तो शिक्षालय को उस इंसान को तैयार करने को निकली थी जो इंसान इंजीनियरिंग,डॉक्टरी या किसी भी पेशे में जाए किंतु अपने ईमान की कीमत न लगाए किंतु उसे क्या पता था कि अपना ईमान बेच चुकी व्यवस्था मुआवजा राशि बहुत जल्दी तय कर देती है क्योंकि उन्हें इंसान की जान की कीमत आंकनी ही नहीं आती है-
" आंसू गिरा जो आंख से तकदीर ने कहा ,
यूं खाक में मिलते हैं देखो आबरूपसंद" अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹