'संवाद' ट्रॉली टाइम्स अखबार किसानों के आंदोलन को एक मजबूत वैचारिक आधार देने की नायाब कोशिश है।। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महापुरुषों ने अपने विचारोत्तेजक लेखों के द्वारा जनता को आंदोलन के लिए मानसिक रूप से तैयार किया। उस समय के अखबारों के माध्यम से जितने गंभीर और प्रेरणादाई विचार जनता के बीच पहुंचते थे, उन्हीं के कारण लोगों में स्वतंत्रता के लिए असीम त्याग और बलिदान करने की भावना उत्पन्न हुई। मल्टी मीडिया और प्रिंट मीडिया के आज के जमाने में गोदी मीडिया द्वारा किए जा रहे भ्रामक प्रचार के प्रत्युत्तर में पटकथा लेखक सुरमीत मावी और गुरदीप सिंह ने ट्रॉली में भरकर आए किसानों के आंदोलन के लिए 4 पेज का अखबार पंजाबी और हिंदी में शुरू किया जिसका शीर्षक है - "जुडांगे,लड़ांगे,जीतेंगे" अर्थात् एकजुट रहकर लड़ेंगे तो जीतेंगे.


हाड़ कंपकंपा देने वाली सर्दी में जब एक-एक कर किसान दम तोड़ रहे हैं, उस वक्त लोगों को एकजुट रखना और जीत का भरोसा देकर लड़ने के लिए प्रेरित करना अद्भुत है।। जिस ब्रिटिश सरकार के राज्य में सूर्य अस्त नहीं होता था ,उस सर्वशक्तिशाली राज्य में वयोवृद्ध पंजाब केसरी लाला लाजपत राय से लेकर नौजवान भगत सिंह तक ने अपने लेखों के माध्यम से जनता का मानस तैयार कर स्वतंत्रता का नया सूरज उगा दिया। ट्राली टाइम्स अखबार की 2000 प्रतियां किसानों के बीच बांटी गयी। यह प्रयास बहुत छोटा सा दिखता है किंतु इतना रचनात्मक और पवित्र है कि इसे आत्मनिर्भर भारत का ब्रांड एंबेसडर प्रयास की संज्ञा दी जा सकती है-


तिलक,गांधी जैसे पत्रकारों को आज तरजीह कहां मिल पाता है?


राष्ट्र-निर्माण का स्वप्न लिए यहां कौन अलख जगाता है?? जनजातीय क्षेत्र में स्मार्टफोन के अभाव में अधिकांश विद्यार्थी जब किसी भी प्रकार के मार्गदर्शन से वंचित हैं तो स्थानीय अखबारों में एक कॉलम स्टडी टाइम्स के नाम से बनाया जा सकता है, जिसमें विद्यार्थी केंद्रित मुद्दों पर लेख लिखकर अंधेरे में भटकते हुए विद्यार्थियों को सन्मार्ग दिखाया जा सकता है। 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹