किसी भी परिस्थिति में मन:स्थिति कैसी हो
December 25, 2020'संवाद' गीता-जयंती मनायी जाती है जबकि यह महाभारत का एक अंशमात्र है। कारण है कि जीवन में घटना का महत्व कम और विचारणा का महत्व बहुत ज्यादा है। "किसी भी परिस्थिति में मन:स्थिति कैसी हो"इसका ज्ञान गीता देती हैं। महाभारत युद्ध में बहुत सारी घटनाएं घटी किंतु गौण हो गईं। युद्ध के पहले अर्जुन के मन में विचार उठा और वह विषाद(डिप्रेशन)को प्राप्त हो गया। यह बात आज बहुत महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि कोरोना के संकटकाल में लोग गहरे अवसाद और विषाद में पड़ते जा रहे हैं। कृष्ण ने अर्जुन के विषाद(Depression) को योग बना दिया और वह चिंतामुक्त होकर अपने कर्म में संलग्न हो गया।
विषाद-योग नामक गीता के प्रथम अध्याय से मोक्षसन्यास-योग नामक 18वें अध्याय तक कृष्ण को उत्तर देने का अवसर मिल गया। इसमें मनोविज्ञान की जितनी गहरी और सूक्ष्म समझ प्रदर्शित की गई है, उतनी अन्यत्र मिलनी मुश्किल है। महामारी-बेरोजगारी इत्यादि अनेक कारणों से आज विषाद जीवन को चारों तरफ से घेर लिया है तो इस वजह से बहुत ज्यादा आत्म हत्याएं हो रही हैं। काश!कृष्ण मिल जाएं तो यह विषाद योग बन सकता है और आत्महत्या आत्मक्रांति में तब्दील हो सकती है। प्रतिकूल परिस्थितियों में मन टूट जाता है और पलायन अथवा आत्मघात का विचार उठता है। पतंग जब धागे से टूट जाती है तो इसे दुर्भाग्य समझा जाता है किंतु परमात्मा की हवाओं के साथ जुड़ जाती है जो कि सौभाग्य बन जाता है। यह टूटा हुआ मन परमात्मा से जुड़ सकता है जिसके कारण संकट शुभ-अवसर बन सकता है। कोरोना हो गया, नौकरी छूट गई,घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और कर्जदार हो गए तो मन कहता है कि सारे रास्ते बंद हो गए। गीता कहती हैं कि कृष्ण की सुनो यहीं से बहुत बड़ा रास्ता खुलता है। तुम्हें जो संकटों का पहाड़ दिखाई दे रहा है सिर्फ इन्हीं से आंखों को मत भर लो।। दृश्य से बहुत बड़ा और ताकतवर अदृश्य हैं, उसी का नाम परमात्मा है। तुम तो अपने हिस्से का कर्म किए जाओ क्योंकि कर्म में ही तेरा अधिकार है- कर्मण्येवाधिकारस्ते । बाकी सारे भार परमात्मा पर छोड़ना सीखो अन्यथा टूट जाओगे। राम को वनवास जाना पड़ा और पांडवों को कृष्ण का साथ होने के बावजूद वनवास के साथ अज्ञातवास को भी झेलना पड़ा ;लेकिन न राम टूटे, न पांडवों ने आत्महत्या की। क्योंकि उस अदृश्य शक्ति पर उनकी अनन्य निष्ठा रही-
"मनुज बली नहीं होत है,समय होत बलवान।
भीलन लूटे अर्जुन को वही गांडीव वही बाण।। आज दुर्भाग्य है कि अर्जुन की स्थिति में हम सभी फंस गए हैं लेकिन किसी कृष्ण से मिलने का और निकलने का रास्ता नहीं पूछ रहे हैं। विकट परिस्थितियों में फंसा हुआ और डिप्रेशन को प्राप्त हुआ अर्जुन ही जब उत्तर देने लगेगा तो आत्मघात होगा लेकिन जब उत्तर अदृश्य परमात्मा रुपी कृष्ण की तरफ से आएगा तो आत्मक्रांति होगी। विषाद-योग से प्रारंभ हुआ महामारी का समय मोक्ष-सन्यास योग तक पहुंचेगा, यही गीता का संदेश है।
'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे गीता जयंती की शुभकामनाओं के साथ 🙏🌹