'संवाद'


बीस का सबक इक्कीस के लिए -


टीस भरे बीस का सूरज डूब रहा है और चंद्रमा उदित हो रहा है। विश्व की इन दो महान विभूतियों के अस्त और उदय को देखकर मन में एक आशा जगती है।। 2021 का सूरज कुछ विशेष होगा जो बाह्यजगत को ही नहीं बल्कि अंतरजगत को भी आलोकित करेगा। क्योंकि


छोटे से विषाणु ने एक ऐसा समय दिखलाया,


शक्तिशाली परमाणु भी वक्त पर काम न आया।


नए स्थान पर जाकर कुछ नए सामान खरीद कर और नए इंसानों से मिलकर लोग नए साल का स्वागत करते हुए जश्न मना लेते हैं लेकिन चेतना में कोई नयापन नहीं आता। महामारी में करोड़ों लोग संक्रमित हो गए और लाखों लोग निर्मम तरीके से काल-कवलित हो गए। व्यापार तहस-नहस हो गया और व्यवहार बदल गया। अतः 2020 का साल एक त्रासदी के साल के रूप में दर्ज हो गया। लेकिन क्या 2020 को सिर्फ मनुष्य की ऐसी आंखों से ही देखा जाना चाहिए? ओजोन लेयर मेँ मनुष्य द्वारा किया गया छेद स्वयं भर गया, गंगा स्वयमेव साफ हो गई, हिमालय मीलों दूर से दिखाई देने लगा और पर्यावरण शुद्ध हो गया। ओशो चेतना कहती हैं कि महामारी कब नहीं थी और कहां नहीं थी? हर जन्म लेने वाले का मरना निश्चित है,अतः महामारी सर्वत्र व सदैव फैली हुई है। महामारी के इस स्वीकारमात्र से महाजीवन का मंत्र संभव है- आत्मवत् सर्वभूतेषु । संकट शुभ- अवसर भी बन सकता है।मनुष्य की अहंकार-केंद्रित चेतना एक नई ऊंचाई ले सकती है और आत्मा-केंद्रित चेतना का जन्म हो सकता है। यह आत्मा पेड़-पौधों से लेकर सभी जीव-जंतुओं तक में है।


न हि मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किंचित अर्थात् मनुष्य से श्रेष्ठतर कुछ भी नहीं है;ऐसी घोषणा तब की गई थी जब मनुष्य की चेतना सर्वे भवंतु सुखिन: की भावना रखती थी। कण-कण में भगवान को देखने वाली ऐसी चेतना मानती है कि किसी जन्म में हम पेड़-पौधे भी थे और किसी जन्म में जीव-जंतु भी; लगातार अर्जित पुण्य से मनुष्य का जन्म मिला। आज भी ऐसे लोग हैं जो पेड़- पौधों के संरक्षण में अपना जीवन लगा देते हैं और जीव-जंतुओं की सेवा में अपने आप को खपा देते हैं।


इतनी संवेदनशीलता और सर्व-समावेशीभाववाली चेतना को जन्म देने में 2021का साल सफल हो सका तो पृथ्वी रूपी ग्रह का भविष्य सुरक्षित है।


टीस भरे बीस का इक्कीस के लिए यही संदेश है।


'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ.सर्वजीत दुबे मंगलकामनाओं सहित 🙏🌹