'संवाद'
January 8, 2021'संवाद'
ट्रंप-कार्ड ने विश्व के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश को जड़ों से हिला दिया। किसी भी कीमत पर व्हाइट हाउस में बने रहने के ट्रंप के इरादे ने लोकतांत्रिक-चेतना को नेस्तनाबूद कर दिया।
लोकतांत्रिक-चेतना का निर्माण तभी संभव है जब साधन और साध्य की पवित्रता मेँ अटूट आस्था हो।
गांधीजी ने इसे सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्थापित किया जब चौरी-चौरा कांड के बाद परवान पर चढ़े असहयोग आंदोलन को सब के विरोध के बावजूद उन्होंने तुरंत वापस ले लिया। उनका स्पष्ट मत था कि हिंसा के रास्ते से प्राप्त आजादी नहीं चाहिए क्योंकि इससे सत्य और प्रेम के रास्ते पर चलने वाले अहिंसक समाज का निर्माण नहीं हो सकता।
आज साधन और साध्य दोनों अपवित्र होते जा रहे हैं। सत्ता एकमात्र साध्य बन गया है और साधन के रूप में धनबल, बाहुबल, छल-छद्म-बल इत्यादि सर्व स्वीकृत होते जा रहे हैं।
जो सत्ता सेवा का एक माध्यम-मात्र थी,आज उसका सेवा से कोई संबंध नहीं दिख रहा है। इस कारण से लोकतंत्र खतरे में पड़ता जा रहा है। राजतंत्र के युग में भी राम की चेतना लोकतांत्रिक थी। अतः उन्होंने पिता के वचन का सम्मान करते हुए राज्य को छोड़कर जंगल की ओर प्रस्थान कर गए और वहां भी जनसेवा में संलग्न हो गए। भरत ने भी चरण-पादुका रखकर अयोध्यावासियों की सेवा की। सेवा की ख्वाहिश हो तो बहुत प्रकार से सेवा की जा सकती है-
ख्वाहिश हो तो काम बहुत हैं ,
जीवन के पैगाम बहुत हैं।
इश्क नहीं है सबकी मंजिल,
नाम से तो गुलफाम बहुत हैं।।
लोकतंत्र में तो पक्ष हो या विपक्ष दोनों मिलकर जनता की सेवा के लिए चुने जाते हैं। पक्ष को बहुमत होता है किंतु इससे विपक्ष को कमजोर नहीं माना जा सकता और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपक्ष के प्रति सम्मान की भावना से लोकतांत्रिक-चेतना मजबूत होती हैं और सत्ता की लोकप्रियता बढ़ती है।
किंतु दुर्भाग्य से ट्रंप ने जीत हासिल कर चुके बाइडेन को मतों को चुराने वाला और जनता को गुमराह करने वाला साबित करने की कोशिश की। साथ ही अन्य सारी संस्थाओं को डरा धमका कर जनमत को बदलने का प्रयास किया।। जिसका नतीजा यह हुआ है कि विश्व के अन्य नेताओं के साथ स्वयं ही उनकी पार्टी के लोग उनके विरुद्ध आज खड़े होने लगे हैं। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। 'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹