मकर संक्रांति
January 14, 2021'संवाद' "मकर संक्रांति"
संक्रांति अद्भुत शब्द है। क्रांति में मनुष्य जबरदस्ती हिंसा के द्वारा परिवर्तन के रास्ते पर बढ़ता है किंतु संक्रांति में मनुष्य अपने शुभ संकल्प को परमात्मा के चरणों में समर्पित कर देता है और उनकी कृपा की प्रतीक्षा करता है।
मकर संक्रांति में सूर्य उत्तरायण होकर भारत के समीप आ जाता है और दिन बड़ा होने का क्रम शुरू हो जाता है। अब रातें शनै: शनै:छोटी होती जाएंगी अर्थात् निराशा,हताशा, असफलता और अंधकार सिमटते जाएंगे।
आशा का सूर्य बड़ा होता जाएगा जिसकी घोषणा आकाश में अरमानों के पतंग को ऊंचा उड़ा कर जोर-शोर से किया जाएगा। संगम वाली नदियों में स्नान और दिल खोलकर दान के कारण पूरा वातावरण धार्मिक हो जाएगा।
एक वक्त बदला कोरोना ने और लोग घरों में बंद होने को मजबूर हो गए। आशा है मकर संक्रांति के साथ वक्त बदलेगा और लोग स्वतंत्र होकर विचरण कर सकेंगे। साथ ही अपने पंखों को फैलाकर सपनों के आकाश में मनचाही उड़ान भी भर सकेंगे। _मनुष्य का संकल्प और परमात्मा के प्रति समर्पण के साथ जब मकर संक्रांति का अनुकूल वक्त मिलेगा तो एक अद्भुत संयोग बनेगा।
वीरान पड़े स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने-पढ़ाने वालों के मिलन का अद्भुत नजारा दिखेगा-
चमन फिर गुलजार होगा
बुलबुलें फिर से गाएंगी।
खिजाँ है आज तो फिक्र क्या
बहारें फिर से आएंगी।।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे मकर संक्रांति की शुभकामनाओं सहित...🙏🌹