अनुकूल वक्त की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करो और आत्मविश्वास के साथ परमात्मा पर अपनी श्रद्धा को बनाए रखो तब हार भी जीत बन जाएगी।
January 21, 2021'संवाद'
भारत की ऑस्ट्रेलिया में जीत ने टीम को बुलंदियों पर पहुंचा दिया है और सुर्खियों में ला दिया है। यह वही टीम है जो स्टार बल्लेबाजों के रहते न्यूनतम स्कोर का रिकॉर्ड बनाई थी और अब स्टार बल्लेबाजों के बिना इतना बड़ा जीत का रिकॉर्ड बनाई। इंजरी(Injury) और नस्लभेदी टिप्पणी के बावजूद विदेशी धरती पर बैरी दर्शकों के बीच नए खिलाड़ियों द्वारा हासिल की गई यह उपलब्धि हमें जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेशों को देती हैं।
(1) फर्श से अर्श तक की यात्रा के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने आप पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
(2) आत्मविश्वास को तोड़ने वाली प्रतिद्वंदी खिलाड़ियों की टिप्पणियों को और हूटिंग करने वाले दर्शकों के दुर्व्यवहार को हतोत्साहन के बजाय प्रोत्साहन के रूप में तब्दील करने वाली कला आनी चाहिए। महाभारत के युद्ध से पहले पांडवों की सभा में चर्चा चल रही थी कि कौरवों के पास बड़े-बड़े सेनापति और योद्धा हैं, ऐसे में कृष्ण ने पूछा कि युद्ध में जाने के लिए प्रेरणा देने वाली चीज पांडवों के पास क्या है? अर्जुन का जवाब मेरे दिल को छू गया - हे केशव! द्रौपदी के खुले हुए बाल हमारे पास है।
यदि किसी ने आपको अपमानित किया है तो उस अपमान की आग आपको अंदर से जला भी सकती है और रोशनी भी दे सकती है। मेरी नजर में भारतीय टीम ने अंदर में हो रहे अपमान की आग को रोशनी में तब्दील कर लिया।-
" ये बताया गहन अंधेरों ने रोशनी अपने दम से मिलती है।_
हम पर इतने करम किए उसने कि अब तो राहत सितम से मिलती है।।
क्रिकेट ने मेरे जीवन का बहुत समय और ऊर्जा लिया लेकिन एक बड़ा संदेश दे गया-(१) "अनुकूल वक्त की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करो और आत्मविश्वास के साथ परमात्मा पर अपनी श्रद्धा को बनाए रखो तब हार भी जीत बन जाएगी।"
(२) जीवन एक खेल से ज्यादा कुछ नहीं है किंतु खेल भावना से बड़ा भी जीवन में कुछ नहीं है।
महामारी की प्रतिकूल परिस्थितियां भी एक दिन अनुकूल होगी और महाजीवन का सूर्य भी उगेगा और बड़ा भी होगा _लेकिन तब तक महाजीवन की मन:स्थिति को जिंदा रखना होगा ; यही खेल भावना है-
खोल आंख जमीं देख, फलक देख, फजां देख।
मशरिक से उभरते हुए सूरज को जरा देख।।
पूरब दिशा की तरफ आंखें गड़ाए रखो ; अंधेरी रात के बाद हम सब के भाग्य का सूरज भी चमकेगा।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹