'संवाद'


एक थे वे नेताजी.....


जो नाम देश का ले कर के मर गए, मिटे बर्बाद हुए।


जिनकी कुर्बानी के बल पर हम सभी आजाद हुए।।


नेताजी सुभाष चंद्र बोस सिर्फ एक व्यक्ति ही नहीं थे बल्कि एक अभिव्यक्ति भी थे।वे अभिव्यक्ति थे देशभक्ति और त्याग के ; जिसके कारण उन्होंने देश सेवा के लिए ICS की बड़ी नौकरी भी त्याग दी। वे अभिव्यक्ति थे स्वाभिमान और समर्पण के ; जिसके कारण एक तरफ गांधी जी की नीतियों की कटु आलोचना करते थे और उनके मनपसंद उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को शिकस्त दी तो दूसरी तरफ उनकी नीयत के कारण हृदय में इतना आदर था कि गांधी जी को राष्ट्रपिता के संबोधन से याद किया। वे अभिव्यक्ति थे पराक्रम और सौहार्द के ; तभी तो एक तरफ ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आजाद हिंद फौज का नेतृत्व संभाला और दूसरी तरफ सभी संप्रदाय के लोगों को एकजुट कर सौहार्द को बढ़ावा दिया।


आज हृदय बहुत व्यथित है क्योंकि नेताजी को साध्य बनाने की बजाए साधन की तरह इस्तेमाल करने का प्रयत्न हो रहा है।


पश्चिम के सबसे बड़े दार्शनिक कांट कहते थे कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में साध्य है। किसी व्यक्ति का भी साधन की तरह इस्तेमाल करना अनीति है।


अनीति इतनी बढ़ती जा रही है कि अब देश बनाने वाले महापुरुष भी साधन बनाए जाने लगे हैं चुनाव जीतने के लिए।


'जाकी रही भावना जैसी,


प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।' अपनी भावना के अनुरूप कोई नेताजी के जन्मदिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना चाहता है तो कोई देशप्रेम दिवस के रूप में। लेकिन भावना तो सब को जोड़ने की और देश बनाने की हो।


"चलो अब किसी और के सहारे लोगों


बड़े खुदगर्ज हो गए हैं किनारे लोगों।


उम्मीद की हदें टूटी तो ताज्जुब नहीं


अब म्यान से बाहर है तलवारें लोगों।।


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे


नेताजी के जन्म दिवस की शुभकामनाओं सहित 🙏🌹