'संवाद'


"बेटी नहीं है किसी से कम ,


सब कोई दूर करो यह भ्रम।"


रोड के किनारे बोर्ड पर लिखा यह नारा देख कर मुझे कमला हैरिस की याद आ गई। राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी को मनाया जाता है ताकि बालिका के दिमाग में यह बिठाया जा सके कि हर बेटी इतनी बड़ी संभावना लेकर पैदा होती है कि विदेशी धरती पर जाकर भी सर्वोच्च पद के लिए अपने आप को योग्य साबित कर दे। यहां तक पहुंचने का श्रेय अमेरिका की नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला जी अपनी मां श्यामला को देती हैं। कोई भी मां पुरुष-मानसिकता की शिकार होकर बेटों की चाहत में यदि बेटियों की उपेक्षा न करे तो बेटियां भी सब कुछ कर सकती हैं।


किसी भी व्यक्तित्व का विकास सोच पर निर्भर करता है। सबसे पहले मां-बाप की सोच, परिवार की सोच और समाज की सोच। और सबसे महत्वपूर्ण स्वयं की सोच निर्णायक भूमिका निभाती है।


नेहरू जी ने अपनी बेटी को अपने प्यार और विश्वास से आयरन लेडी बना दिया। बेटी से दूर रहने पर वे पत्र लिखा करते थे जो पिता का पत्र पुत्री के नाम से मशहूर हुआ। इससे बेटी की एक सोच और समझ बनी और बाद में उसने अपने अंतर्निहित शक्तियों को चरम पर पहुंचाया।


इरा दिव्यांग थी किंतु अपनी शारीरिक कमजोरियों पर ध्यान न देकर कर उसने अपने मानसिक पक्ष को तराशा और 2014कीआईएएस टॉपर बनीं। मां-बाप के सहयोग के कारण उसे कभी लड़की होने और दिव्यांग होने के भाव ने कमजोर नहीं बनाया।


जब एक तरफ इंदिरा, कमला,इरा, किरण बेदी,सिंधु जैसी अनेक शख्सियतों की तरफ देखता हूं तो मन आशा से भर जाता है किंतु दूसरी तरफ आदिवासी अंचल के कन्या महाविद्यालय की बालिकाओं को देखता हूं तो सोच में पड़ जाता हूं कि क्या एक-दो फूल के खिलने से समस्त उपवन को खिला हुआ माना जा सकता है-


एक फूल का खिल जाना ही उपवन का मधुमास नहीं है।


स्वाति की कुछ बूंद मात्र से, बुझती सबकी प्यास नहीं है।।


इस क्षेत्र में शिक्षा के नाम पर स्कूल-कॉलेज काफी खोले गए हैं किंतु सोच की और योग्य शिक्षकों की कमी इतनी ज्यादा है कि वांछित परिवर्तन संभव नहीं हो पा रहा। सिर्फ स्कॉलरशिप के लिए एडमिशन लेना और पासबुक से पढ़कर पास होने की मानसिकता योग्यता को बहुत ज्यादा बढ़ने नहीं देती।


कॉलेज आने वाली बालिकाएं चाहें तो अपनी सोच बड़ी बना सकती हैं किंतु इसके लिए उन्हें मौलिक पुस्तकों और विस्तृत अध्ययन पर जोर देना होगा।


सरकार और समाज को भी योग्य शिक्षकों और गुणवत्तायुक्त शिक्षा के विशेष प्रोत्साहन हेतु आगे आना होगा। तभी 'बेटी नहीं किसी से कम' का भ्रम दूर होगा।


कन्या-महाविद्यालय से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹