'संवाद'
January 26, 2021'संवाद'
गणतंत्र गुणतंत्र में कैसे बदले?
ब्रिटिश राजतंत्र की गुलामी से मुक्त होकर स्वतंत्र होकर हमने लोकतंत्र शासन पद्धति अपनायी। 26 जनवरी 1950 को संविधान को लागू कर भारत गणतंत्र बना।
अब चिंतन का विषय यह है कि हमारा गणतंत्र गुणतंत्र में कैसे बदले? लोगों के अनुसार शासन हो ,यह प्रथम कदम था किंतु संविधान के अनुसार शासन हो यह हमारा अगला कदम था। *लोकतंत्र भीड़तंत्र बनकर न रह जाए इसलिए हम सब ने संविधान को अधिनियमित,अंगीकृत और आत्मार्पित कर जनतंत्र को गणतंत्र में बदला।
संविधान सभा के अपने अंतिम भाषण में डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि संविधान की नजरों में हम सभी समान हैं किंतु हमें सर्वत्र सामाजिक और आर्थिक जीवन में असमानता दिखाई देगी।
यह सबसे बड़ी चुनौती आज भी है।
लिंग,जाति, धर्म, क्षेत्र व भाषा इत्यादि के आधार पर इस असमानता के दर्शन हमें पग-पग पर होते हैं। इस असमानता को दूर करने का एक बड़ा उपाय है सबको एक समान शिक्षा। किंतु दुर्भाग्य से शिक्षा का अधिकार मिलने के बावजूद भी शिक्षा की पहुंच सब तक नहीं हुई। गुणवत्तायुक्त समान शिक्षा सबको सुलभ हो, यह तो बहुत दूर की बात है।
कोरोना की महामारी के चलते ऑनलाइन शिक्षा प्रयोग में लाई गई किंतु इसने असमानता को बहुत बड़े रूप में उजागर कर दिया।
जिन घरों में खाने को रोटी और पहनने को कपड़े तक नहीं है, उन घरों के लिए भी महामारी के समय ऑनलाइन शिक्षा ही एकमात्र विकल्प रहा।
मजदूरों की दयनीय स्थिति, बेरोजगारी की भीषण परिस्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति के बावजूद कोरोना के दौरान आपसी सहयोग और सामंजस्य बहुत प्रशंसनीय था।
संकट ने यह दिखाया कि हमारा सामान्य चरित्र सहयोग और परोपकार का है- पर दुखे उपकार करे पर मन अभिमान न आने रे। किंतु इस चरित्र को जब तक उत्कृष्ट शिक्षा का आधार नहीं मिले गुणवत्तायुक्त और कौशलयुक्त गण (नागरिक) देश को नहीं मिल सकते।
एक तरफ किसान आंदोलनरत हैं तो दूसरी तरफ जवान रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। किसान और जवान का देश भारत वैज्ञानिक सोच वाला बने तभी गणतंत्र गुणतंत्र में तब्दील हो सकता है। जिस प्रकार से कोरोना की वैक्सीन हमने तैयार कर ली, उसी प्रकार से सबके लिए गुणवत्तायुक्त समान शिक्षा की व्यवस्था कर हम आदर्श गणतंत्र बनने में सफल होंगे, ऐसी आशा है।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ🙏🌹