वीडियो में ☝️शनिवार को भी छात्राओं की उपस्थिति की संख्या यह बता रही है कि क्लास-टीचिंग और शिक्षक उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।
February 27, 2021वीडियो में ☝️शनिवार को भी छात्राओं की उपस्थिति की संख्या यह बता रही है कि क्लास-टीचिंग और शिक्षक उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।
कोरोना के कारण पढ़ाई से दूर हो चुके शिक्षार्थी अपने शिक्षक के मार्गदर्शन में पढ़कर अपना पाठ्यक्रम पूरा करना चाहते हैं ताकि परीक्षा में वे सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त कर सकें। किंतु दुर्भाग्य कि कई विषय के शिक्षक नहीं है। जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उन पर सह-शैक्षणिक गतिविधियों का दायित्व बहुत ज्यादा है।
शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अन्य गतिविधियां आटे में नमक के बराबर हो तो कल्याणकारी होती हैं। लेकिन आटे और नमक का अनुपात यदि गड़बड़ हो गया तो न शिक्षार्थी बचेगा,न शिक्षक और न यह शिक्षा- व्यवस्था । अत: शिक्षा-जगत की अंतरात्मा से यह आवाज आ रही है-
पढ़ने दो , पढ़ाने दो ।
जिंदगी हमें बनाने दो।।
किंतु इस यज्ञ को पूरा करने के लिए शिक्षक और शिक्षार्थी के साथ समाज और सरकार का भी सहयोग अपेक्षित है।
यदि अच्छा शिक्षक मिल जाता है तो सब्जेक्ट में शिक्षार्थी की रुचि इतनी जागृत हो जाती है कि उसका मन पढ़ने में रम जाता है। फिर मन को भटकने का अवकाश नहीं मिलता। इससे परिवार तथा समाज में भी अच्छे वातावरण का निर्माण होता है। सरकार को भी सजग एवं अच्छा नागरिक प्राप्त होता है।
अच्छा शैक्षिक वातावरण मिलने पर युवा पीढ़ी का मन स्वर्ग का निर्माण कर सकता है, अन्यथा नरक का निर्माण स्वयमेव हो जाता है-
मन एवं मनुष्यानाम् कारणं बंध- मोक्षयो: अर्थात्
हे मन के अंगार ! अगर तुम लौ न बनोगे , क्षार बनोगे ।
जो न किरण की रेख बनोगे ,धूलि धुएं की धार बनोगे।। यह मन का अंगार लौ बनकर जगत को रोशन करेगा या धुंआ बनकर वातावरण को प्रदूषित करेगा ; यह हम सब पर निर्भर है।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे 🙏🌹