'संवाद'


"गुनाह"-


मेरी परछाई से दूर रहना और मन लगाकर पढ़ाई करना ये वो शब्द हैं जो फांसी का इंतजार कर रही शबनम ने अपने बेटे को कहा। आजाद भारत की वो पहली महिला होगी जिसे फांसी के फंदे पर चढ़ाया जाएगा। अपने परिवार के सात जनों की हत्या अपने तथाकथित प्रेमी सलीम के साथ मिलकर उसने महज इसलिए कर दी क्योंकि परिजन उसके अवैध संबंध में बाधा उपस्थित कर रहे थे।


इंसान नीचे गिरता है तो हैवान भी शरमा जाता है और ऊंचा उठता है तो भगवान भी आश्चर्य में पड़ जाते हैं।


शबनम का केस अपवाद जरूर है किंतु अवैध संबंधों के कारण अपराध आम हो चला है। बहुत सारे प्रश्न एक साथ मेरी आंखों में नाचने लगे और उन्होंने मेरी नींद उड़ा दी-


(1) उच्च शिक्षा प्राप्त शबनम पांचवी पास सलीम के साथ अवैध संबंध बनाती हैं और गर्भवती होने पर अपने पाप को छुपाने के लिए उसके साथ मिलकर अपने 7परिजनों की निर्मम हत्या कर देती है। पढ़ाई से सोच में अंतर कहां आया? यदि नहीं आया तो क्यों नहीं आया??


(2) मेरी परछांई से दूर रहने वाला वाक्य बताता है कि शबनम की आत्मा स्वयं को भी माफ करने की स्थिति में नहीं है। हर व्यक्ति के अंदर अंतरात्मा की आवाज गूंजती रहती है।जो शांत होकर उस आवाज को सुन लेता है, उसे अंतरात्मा गलत करने से टोक देती है।-


टोक देता है कदम जब भी गलत उठता है,


ऐसा लगता है कि कोई मुझसे बड़ा है मुझमें।


अब तो वही एक शख्स बचा है मुझमें,


मुझको मुझसे जुदा करके जो छुपा है मुझमें।।


(3) वह विद्या जो जीवन का मकसद बताती थी और उसे सार्थक बनाती थी; आज कहां है? अपनी वासनाओं के गुलाम होकर लोग कैसे-कैसे जघन्य अपराधों में लिप्त हो रहे हैं।


सबसे खतरनाक संकेत यह मिल रहा है कि अपराधों की दुनिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।


बेटा कहां जा रहा है और किससे मिल रहा है,ऐसा नहीं पूछने वाले लोग भी बेटी कब और कहां जा रही है और क्या कर रही है; इस पर कड़ी नजर रखते थे। आधुनिक जीवन शैली में परिवार और समाज की यह पहरेदारी और अभिभावक की भूमिका महत्वहीन होती जा रही है। जबकि होना यह चाहिए कि बेटी हो या बेटा दोनों पर बड़ों की दृष्टि सदैव पड़ती रहे और मार्गदर्शन देती रहे।


_शबनम का केस परिवार और समाज के साथ शिक्षा-व्यवस्था पर भी पर बहुत गहरे प्रश्न खड़ा कर रहा है।


अर्थ और शक्ति केंद्रित इस मशीन प्रधान युग में मानव-निर्माण करने वाले संस्कार यदि नहीं बचाए जा सके तो फिर कुछ नहीं बचेगा।


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹