संवाद:संदर्भ 'अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च'


"स्त्री का अर्थ है रचनात्मकता"


कल मेरे मोहल्ले में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके कचरा-गाड़ी में डालने के मुद्दे पर गाड़ीवाले और मोहल्लेवाले में ठन गई। मोहल्लेवाले की जिद थी कि नया नियम हमें मत सिखाओ जबकि कचरा-गाड़ी-वाले का कहना था कि हमें ऊपर से आदेश मिला है। यह मामला मेरी नजर में जिद और आदेश से ज्यादा समझदारी और सजगता का है। 'हर काम सरकार करेगी' की मानसिकता में बदलाव आना चाहिए और हर एक को अपना नागरिक-धर्म समझना चाहिए। इस संबंध में बेंगलुरु की 26 वर्षीया छात्रा निवेधा की दास्तान् बहुत प्रेरणादायी है और स्त्री-सोच को परिलक्षित करती है।


शानदार बिल्डिंगों के बाहर लोहे के एक विशाल कूड़ेदान में सड़ रहा कचरा अपने बदबू से अगल-बगल के उद्यानों में खिले फूलों की खुशबू को फीका कर देता है। सब्जी के छिलके,दूध का थैला, यूज़ किया हुआ डायपर,e-commerce वाले गत्ते के डिब्बे और न जाने क्या-क्या मिलकर ऐसा बदसूरत नजारा पेश करते हैं कि बिल्डिंग और उसमें रहने वालों की खूबसूरती धूमिल पड़ जाती है।


सभी के पास शिकायतें हैं किंतु समाधान किसी के पास नहीं।


लेकिन निवेधा ने समाधान की दिशा में रचनात्मक कदम बढ़ाया। आरवी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग की छात्रा ने अपने कॉलेज के पास अपने दोस्तों के साथ मिलकर गली में सफाई अभियान चलाया। उनकी मेहनत से जगह साफ-सुथरी और दर्शनीय हो गयी,जिसकी लोगों ने तारीफ शुरू कर दी।


किंतु एक हफ्ते के बाद वहां कचरे का ढेर फिर लग गया क्योंकि लोगों ने गीले और सूखे कचरे को अलग करके फेंकने का कष्ट भी नहीं उठाया। जबकि निवेधा ने सबको इसके लिए प्रेरित किया था और समझाया था कि गीले का कंपोस्ट बन सकता है और सूखे की रिसाइकिलिंग हो सकती है अन्यथा कचरे का पहाड़ खड़ा हो जाएगा।


आश्चर्य और गुस्से से भरी निवेधा कॉरपोरेशन के पास गई तो जवाब मिला कि गलती हमारी नहीं, लोगों की हैं।


लोगों की सोच बदलता न देखकर निवेधा ने अब तकनीकी Solution की ओर कदम बढ़ाया। एक ऐसी मशीन बनाने की सोची जो किसी भी तरह का कचरा लेकर उसमें से गीले और सूखे को अलग- अलग कर दे। लोगों ने चर्चा के क्रम में उससे कहा कि ऐसी मशीन न आज तक बनी है और न कभी बन सकेगी।


स्वयं पर विश्वास रखकर और मां से उनके बचत खाते से ₹200000 की प्रोत्साहन राशि पाकर निवेधा ने अपने आईडिया के अनुसार एक वर्किंग मॉडल बनाया।


अपनी आइडिया को आगे बढ़ाने हेतु निवेधा ने एलीवेट100 प्रतियोगिता में भाग लिया। उन्हें सराहना के साथ ₹1000000 की राशि भी प्राप्त हुई।


इससे एक बड़ी मशीन उन्होंने तैयार की और उसका डेमो दिया। किंतु 10 मिनट के अंदर मशीन बंद हो गई। कारण था- कचरे की थाली में किसी ने बड़ा पत्थर डाल दिया था।


इस असफलता से निराश होने की जगह निवेधा ने और बेहतर इडियट-प्रूफ मशीन तैयार की। आज ट्रैशबाट Waste shorting machine बेंगलुरु और अन्य शहरों में दिन-रात चल रही हैं।समाज के हित में काम करने वाली कंपनी आज प्रॉफिट भी कमा रही है।


निवेधा का अर्थ होता है- रचनात्मकता (Creativity)। नकारात्मकता और विध्वंसात्मकता की भीड़ के बीच रचनात्मकता(निवेधा) ने कूड़ेदान पर गहरी नजर गड़ाकर गोल्डन समाधान निकाल डाला, जिसे विशेषज्ञ भी नामुमकिन मानते थे।


बचपन से ही छोटी-छोटी चीजों को संवारकर अपनी रचनात्मकता से उन्हें सौंदर्यपूर्ण बनाने की नैसर्गिक-कला ने स्त्री वर्ग को विशेष बना दिया है-


भीड़ का साथ निभाने की जरूरत क्या है?


लोग पत्थर हैं,उन्हें मनाने की जरूरत क्या है?


अपने कदमों पर भरोसा तो करो ऐ हमदम,


इन कदमों को जमाने की जरूरत क्या है??


'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ सर्वजीत दुबे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाओं सहित 🙏🌹