संवाद


"ऑक्सीजन मैन" की जीवन-दृष्टि ने मेरा मन मोह लिया। इस समय मुंबई में ऑक्सीजन की कमी वाले जगहों पर वे त्वरित ऑक्सीजन की आपूर्ति करा रहे हैं। जहां सरकारें विफल हो रही हैं, वहां एक व्यक्ति की जरूरतमंद को ऑक्सीजन पहुंचाने की मुहिम संदेश देती है कि महामारी सिर्फ मारने के लिए ही नहीं बल्कि कुछ मसीहा को पैदा करने के अवसर भी लाती है।


पहले कोविड लहर में ऑक्सीजन की कमी से इनके दोस्त की पत्नी ने दम तोड़ दिया था, उस सदमे को सार्थक रूप देते हुए इन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर एक समूह बनाकर एक कॉल पर जरूरत की जगह पर ऑक्सीजन पहुंचाने की ठान ली।


हम कल्पना कर सकते हैं कि जब हमारे प्रियजन ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हों ,उस समय सरकार तथा अस्पताल-प्रबंधन के हाथ खड़ा करने पर भी एक व्यक्ति जान बचाने के लिए ऑक्सीजन लेकर आ सकता है, वह हमारे लिए कितना अमूल्य हो जाता है मानो साक्षात् हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर लक्ष्मण के लिए आए हों और राम के हृदय के प्राणाधार बने हों।


इस युवा शख्स का नाम है शाहनवाजनवाज का अर्थ होता है कृपालु और शाह का अर्थ होता है राजा। शाहनवाज बता रहे थे कि दूसरी लहर इतना ज्यादा संक्रामक है कि पहली लहर में 50 कॉल आते थे तो आज दूसरी लहर में दिन भर में 500 कॉल मेरे पास आते हैं। ऐसे समय में हर एक को कोविड-मर्यादा का पालन करते हुए अपना नागरिक धर्म निभाना होगा।


शिक्षा जगत का यह मुख्य दायित्व बनता है कि शाहनवाज जैसी आत्मा की कहानी जन-जन और घर-घर तक पहुंचाए ताकि इस महामारी के काल में कई आत्माएं जग सके। राम के हुए युग हो गए, यदि आज भी उनकी याद महान आत्माओं को जगाने में मदद कर सकती हैं तो जिंदा विचर रहे प्रेम और करुणा की मूर्तिरूप राम की चर्चा कितनी आत्माओं को महात्मा बनने की प्रेरणा देगी।


महामारी के समय में जीवन रक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों के नाम प्रमुखता से छापे जाते हैं तो जीवन बचाने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वालोँ का भी नाम प्रमुखता से छापा जाना चाहिए-


" रात में एक सितारा भी बहुत होता है।


आंखवालों को इशारा भी बहुत होता है।।"


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे चैत्र-नवरात्रि की और रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाओं सहित 🙏🌹