संवाद संदर्भ 'विश्व पृथ्वी दिवस'


"पुत्रोअहम् पृथिव्या:"


काश!पृथ्वी के साथ माता का संबंध निभाया गया होता तो पुत्रों ने धरती की कोख में से जबरदस्ती सब कुछ नहीं निकाल लिया होता और आकाश को छेद कर ओजोन लेयर को चौड़ा नहीं बना दिया होता। पेड़-पौधों को काटकर माता को नंगा और विरान नहीं बना दिया होता।


मां तो स्वयं सब कुछ देती है और बड़े प्रेम के साथ देकर प्रसन्न भी होती है,उस अनुग्रह को अनुभव करने वाले ऋषियों ने भूमि को माता कहा था।


लेकिन बाद की पीढ़ियों ने अपनी उपभोक्तावादी दृष्टि के कारण विज्ञान का उपयोग प्रकृति को जीतने के लिए किया।


क्या कोई पुत्र अपनी माता से जीतने की कोशिश करता है? मां तो जीती ही पुत्र के लिए हैं ,लेकिन पुत्र की लूट-खसोट वाली दृष्टि हो जाए तो मां की दुर्दशा होनी ही थी।


परिणाम में स्वर्ग सी पृथ्वी नरक हो गई।जिस शस्य-श्यामला पृथ्वी पर ऑक्सीजन का आधिक्य हुआ करता था,वहां पेड़ की कमी के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी किल्लत हो गई है और सांसें टूट रही हैं।


यह उस सोच का परिणाम है जहां अधिकतर राष्ट्र अपनी कुल आय का 70% रक्षा उपकरणों पर खर्च कर रहे हैं। कार्बनडाइऑक्साइड का उत्सर्जन आवश्यकता से अधिक मात्रा में कर रहे हैं,जहां हजारों लाखों पेड़ काटकर सड़कें चौड़ी की जाती है और नए पत्थर के नगर बसाए जाते हैं।विकास और पर्यटन उद्योग के नाम पर देव भूमियों को तांडव भूमि में तब्दील कर दिया जाता है।


विश्व पृथ्वी दिवस तो एक मौका है जब हम सोच सकते हैं कि हरी- भरी धरती पर ऑक्सीजन की इतनी भारी कमी क्यों और कैसे हुई? डॉ. तृप्ति की आंखों से अतृप्ति के इतने आंसू क्यों गिर रहे हैं?


पत्थरों के शहर में कच्चे मकान कौन रखता है?


अपने घरों में अब हवा के लिए रोशनदान कौन रखता है??


बहलाकर छोड़ आते हैं लोग वृद्धाश्रम में मां-बाप को,


अपने घरों में अब पुराना सामान कौन रखता है????


अपनी मां को वृद्धाश्रम में छोड़ आने वाली सोच पृथ्वी माता के साथ शुरू हुए दुर्व्यवहार का अंतिम परिणाम है।


क्या हम सोच सकते हैं कि एक एक पेड़ काटने का नतीजा है कि हम आज ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे हैं। जहां पर पेड़ हैं,वहां ऑक्सीजन पृथ्वी-माता स्वत: दे रही हैं और जहां पर नहीं हैं ,वहीं पर सिलेंडर के द्वारा पहुंचाने की कोशिश हो रही हैं।अपनी माता से दूर होने का यही परिणाम होता है-


"शाख से पता अगर जुदा हो जाएगा।


हादसों का फिर शुरू एक सिलसिला हो जाएगा।।"


'शिष्य- गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे


"पेड़ लगाओ,पृथ्वी बचाओ।


पुत्र होने का धर्म निभाओ।।" 🙏🌹