संवाद


"ऑक्सीजन को नवीन संबल" ऑक्सीजन को लेकर तड़पते और मरते मरीजों को देखकर डॉक्टरों की करुण पुकार ने हृदय दहला दिया। डॉक्टर जान बचाने के लिए होते हैं; यह कहने के लिए नहीं कि ऑक्सीजन की कमी है,इसलिए हम आपको भर्ती नहीं कर सकते - रूंधे गले से यह कहते हुए डॉक्टर की आंखें नम हो गईं।


व्यवस्था नाकाम और सरकारें विवश और लाचार दिखीं तो उद्योगपतियों का आगे बढ़ कर आना बहुत ही सुखद अहसास लगा। श्री नवीन जिंदल ने राजस्थान, दिल्ली,मध्य-प्रदेश जैसे राज्यों को यह आश्वासन दिया है कि उनकी कंपनी महामारी के समय आ रही ज्यादा ऑक्सीजन की मांग की पूर्ति करेगी। उन्होंने आश्वासन भी दिया कि दो-तीन दिनों में ऑक्सीजन समस्या का समाधान निकल आएगा। उनका साक्षात्कार सुनकर बेचैन हुए मन को बहुत राहत मिली। इसी प्रकार रिलायंस और टाटा ग्रुप ने भी टूटती सांसों को संबल देने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाएं हैं।


सिर्फ समस्या की बात करते हुए एक दूसरे की ओर उंगली उठाना राजनीति है और चुपके से आकर समाधान प्रस्तुत कर देना धर्मभारत में उद्योगपतियों के प्रति आम अवधारणा शोषण करने वाले की रही है,जो कि सही नहीं है। प्राचीन समय में व्यापार करने वाले को श्रेष्ठी कहा जाता था क्योंकि वे शिक्षा,संस्कृति और धर्म का प्रचार करने में अपने अधिशेष धन का सदुपयोग किया करते थे। शिक्षा का केंद्र बिट्स पिलानी,कैंसर इलाज के लिए टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई जैसे अनेक नाम हैं जो कि उनके योगदान के गौरवपूर्ण प्रतीक हैं।


किसी भी क्षेत्र के प्रति हमारा दृष्टिकोण स्वस्थ होना चाहिए और जनकल्याण के लिए उस क्षेत्र के लोगों द्वारा किए गए कार्य को मिसाल के तौर पर पेश किया जाना चाहिए ताकि अन्य को प्रेरणा मिले। परमात्मा ने मनुष्य में सिर्फ लेने की भावना ही नहीं बनायी है बल्कि देने की भावना उससे भी ज्यादा प्रबल बनायी है। सम्यक शिक्षा लेने की भावना रूपी बीज को देने की भावना रूपी वृक्ष में बदल देती है। बस इतना है कि देने के पहले बीज खाद-पानी पाकर वृक्ष बन जाता है और फल-फूलों से लद जाता है-


" देते तरु इसलिए कि रेशों में मत कीट समाए


रहें डालियां स्वस्थ और फल नए-नए नित आए।"


रात बहुत अंधेरी है किंतु आशा है कि सितारे भी उतने ही नए-नए उभरेंगे।


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹