डांवाडोल डूबता मन
April 27, 2021संवाद
डांवाडोल डूबता मन
अनिश्चितता,अराजकता और निरर्थकता ने जीवन को आज चारों तरफ से घेर लिया है।पता नहीं कब कौन कोरोना की चपेट में आ जाए। समय पर बेड, दवाई और ऑक्सीजन मिले या ना मिले।कोई कहीं भी संक्रमित हो जाता है और कहीं भी दम तोड़ देता है। तो फिर ऐसे में जीवन का अर्थ क्या है और भगवान है भी या नहीं?
विश्वयुद्धों के समय उपजी ऐसी ही परिस्थितियों में पश्चिमी विचारक नीत्से ने कहा था कि भगवान मर चुका है।(God is dead.)
इस दार्शनिक के इस वाक्य ने जीवन को अवसाद से पूरा भर दिया। परिणामस्वरूप मूल्यविहीनता और आत्महत्याओं का दौर शुरू हो गया।किंतु उसका अगला महत्वपूर्ण वाक्य कि अब मनुष्य स्वतंत्र है लोगों तक ठीक ढंग से नहीं पहुंच पाया। यदि मनुष्य स्वतंत्र है तो यह स्वतंत्रता ऊपर जाने की भी हो सकती है और नीचे गिरने की भी। मानव जीवन की यही गरिमा है कि वह अपनी स्वतंत्रता का सदुपयोग भी कर सकता है और दुरुपयोग भी।
महाभारत युद्ध के पहले आज के मनुष्य की तरह अर्जुन भी डिप्रेशन का शिकार हो गया था। किंतु उसका सौभाग्य था कि उसके पास कृष्ण थे। और उससे भी बड़ा सौभाग्य था कि उसने कृष्ण को सुना और उनके बताए मार्गो पर चला।
आज अव्यवस्था के बीच दवा और ऑक्सीजन टैंकरों की कालाबाजारी के समाचार को सुनकर विश्वास नहीं होता कि ऐसी करूण परिस्थिति में कोई इतना कठोर कैसे हो सकता है। लेकिन हो सकता है, यदि 'भगवान मर गया है' ऐसा मान लिया जाए तो।अब आप के पुण्य-पाप का हिसाब करने वाला कोई नहीं है।
दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जो इस महामारी की परिस्थिति में अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर अपना जीवन सेवा में समर्पित किए हुए हैं। शैतान और भगवान के इन दोनों रूपों को देखकर मानना मुश्किल होता है कि दोनों ही इंसान के दो स्वरूप है। सिर्फ अंतर हुआ है इनकी जीवन-दृष्टि और अपनी परिस्थिति की व्याख्या के कारण।
ऑक्सीजन की कमी से कल अपने परिजन की असमय में मौत की खबर आने पर डूबता हुआ मन कोई किनारा नहीं पा रहा था। टीवी में 25 के मरने की खबर सुनकर मन इतना नहीं टूटा था जितना अपने एक परिजन की मौत को सुनकर तन शिथिल हो गया और मन टूट गया। मोह और ममत्व बहुत बड़ा अंतर कर देता है।
टूट चुके मन को सिर्फ एक ही सहारा बचता है भगवान का। आज भारतीय मन इतनी कठिन परिस्थिति में भगवान के सहारे ही संघर्ष कर रहा है। अन्यथा विक्षिप्तता चरम पर पहुंच जाती। सृजन के साथ संहार के भी देवता हमने बनाए और वे देवों में महादेव कहलाए।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹