वैक्सीन-जान है और जहान भी
May 15, 2021संवाद
वैक्सीन-जान है और जहान भी
विश्व के अन्य देशों ने टीकाकरण के द्वारा महामारी पर नियंत्रण कर लिया वहीं हमने टीकाकरण के संबंध में सबसे कमजोर नीति अपनाई। आज वैक्सीन रूपी ब्रह्मास्त्र की देश मांग कर रहा है।
महाभारत के युद्ध में जब पांडव सेना बुरी तरह से घायल हो रही थी और मारी जा रही थी तो श्रीकृष्ण ने भीम के पुत्र घटोत्कच को युद्ध में उतारा। विशालकाय घटोत्कच के आते ही पूरा दृश्य बदल गया और कौरव सेना मूली-गाजर की तरह काटी जाने लगी। घटोत्कच को हर प्रकार के बाण से कर्ण ने उसके हर अंग को छेद दिया था किंतु वह और ज्यादा विकराल होता जा रहा था।
ऐसी स्थिति में दुर्योधन ने सेनापति कर्ण को कहा कि मित्र! अपना ब्रह्मास्त्र निकालो। कवच-कुंडल के दान के बदले एकघ्नि बाण कर्ण को इंद्र ने दिया था। यह ऐसा अमोघ-अस्त्र था कि जिस पर भी चलाया जाएगा,वह बच नहीं पाएगा।
कर्ण ने इसको सिर्फ अर्जुन के लिए सुरक्षित रख रखा था। लेकिन विशेष परिस्थिति उत्पन्न होते ही उसने दुर्योधन के कहने पर घटोत्कच के लिए इसका प्रयोग कर दिया। घटोत्कच जैसा अजेय दिखने वाला योद्धा तुरंत मारा गया।
आज कोरोना घटोत्कच जैसा विकराल रूप धारण कर चुका है और अन्य उपाय एकदम बौने पड़ गए हैं। विशेषज्ञों की स्पष्ट राय है कि ऐसे में तीव्र गति से पूरे देश का टीकाकरण ही एकमात्र उपाय बचा है। कई कारण इस बात का समर्थन करते हैं-
(१) ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ते लोगों को देखकर आमजन में व्यवस्था के प्रति वितृष्णा घर कर गई है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, फिर भी रोगी को समय पर नहीं मिला। केंद्र का काम सिर्फ ऑक्सीजन का बंटवारा करना है और राज्य का काम उसे हॉस्पिटल तक पहुंचाना है; ऐसे कुतर्कों से सरकारों ने अपने को बचाने का प्रयास किया। कौन सा काम किसका है,इसके निर्धारण में अनगिनत घर उजड़ गए-बहुत देर कर दी हुजूर आते आते।
(२) अब गांवों में कोरोना पैर पसार चुका है और लोग असमय मौत मरने लगे हैं। मरने वालों की संख्या इतनी है कि शमशान-क़ब्रिस्तान कम पड़ गए और खेत-खलिहान में भी जगह नहीं बची तो गंगा में शव डाले जाने लगे हैं। अब सरकारें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने चली हैं, जो बहुत देर से उठाया गया कदम है।
(३) संक्रमण से बचने के लिए मजदूर शहर छोड़कर गांव आ गए थे। अब गांव छोड़कर वे कहां जाएं?
(४) संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन लगाया गया था किंतु वह भी अब बेअसर साबित हो रहा है।
(५) संक्रमण के साथ बेरोजगारी बेतहाशा गति से बढ़ रही हैं और व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा चुकी है।
(६) विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्धस्तर पर टीकाकरण अभियान को नहीं चलाया गया तो जगह-जगह पड़ी लाशों को गिनना मुश्किल हो जाएगा। और कोरोना के संक्रमण से भी ज्यादा खतरा पड़ी हुई लाशों से फैलने वाले संक्रमण का होगा।
(७) कोरोना योद्धा अब लंबी लड़ाई लड़ने की हालत में नहीं है। उद्योग-धंधे वाले अब ज्यादा दिन काम बंद करने की स्थिति में नहीं है। सरकारें सबको राशन मुहैया कराकर लंबे समय तक खिलाने की स्थिति में नहीं है और सबको लंबे समय तक बेरोजगारी भत्ता देने की स्थिति में नहीं है।
(८) ऐसी खराब परिस्थिति में तीसरी लहर आने वाली है जो कि इससे भी ज्यादा संक्रामक और आक्रामक होगी। उसमें सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे होंगे। बाप के कंधे पर बेटे का शव दुनिया का सबसे बड़ा दुख होता है। लोगों की मानसिक हालत अभी ही बद से बदतर हो चुकी हैं। उस समय क्या होगा जब मां की गोद में बच्चे दम तोड़ेंगे और हंसते-खेलते बच्चे का मृत शरीर मां से छिनना पड़ेगा। वैसा दृश्य हम अपनी आंखों से देखना नहीं चाहते। आज ही जीना मुश्किल हो गया है ।अगली पीढ़ी से सूनी दुनिया में जीने से अच्छा मर जाना होगा।
अब ऐसे में महाविनाश रोकने का एकमात्र रास्ता दुनिया के सारे बड़े विशेषज्ञ बता रहे हैं - तीन महीने में पूरे देश का टीकाकरण कर दिया जाए।
आमजन आज यह सुनना नहीं चाहता कि इसमें यह अड़चन है और वह अड़चन है। *महात्मा बुद्ध कहा करते थे कि यदि किसी व्यक्ति को तीर लगा हो तो सबसे पहले तीर निकालने का उपाय होना चाहिए। तीर किसने मारा ,कैसे मारा,कितनी दूरी से मारा,किस प्रकार का मारा-इन सारी बातों पर बाद में इत्मीनान से चर्चा हो जाएगी। सारे नियम-कानून मानव ने मानव के लिए बनाए हैं। अवरोध करने वाले नियम कानूनों को तोड़ने का यह वक्त है। एक झटके में जब पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन और नोटबंदी लागू किया जा सकता है तो इस इमरजेंसी काल में पूरी आबादी के त्वरित टीकाकरण में संकल्प के अलावा और क्या बाधा है?
विधि-विशेषज्ञ मानते हैं कि इस महाविपत्ति काल में आमजन की जीवन रक्षा के लिए यदि सरकारें तुरंत कोई कदम नहीं उठाती है तो अनुच्छेद 32 और 142 के तहत वैक्सीन के बारे में हर आदेश पारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को पूरा हक है।-
आमजन की है बस यही पुकार
टीकाकरण है जीवन अधिकार।
दृढ़-संकल्प की है बस दरकार
अब और न देर करो सरकार।।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹