संवाद


"विज्ञान और कला"


मेडिकल-किट की जरूरत के समय टूल-किट बहुत ज्यादा चर्चा में आ जाए तो इसका मतलब यह हुआ कि विज्ञान की देन(gift of science) सम्यक-कला के अभाव में वरदान की जगह अभिशाप बनने लगी। विज्ञान के आविष्कारों ने बहुत प्रकार की शक्ति मानव के हाथ में दे दी। परमात्मा ने पंख नहीं दिए तो विज्ञान ने प्लेन दे दिए और शक्ति सीमित मिली तो विज्ञान ने असीमित हथियार दे दिए। विज्ञान का जितना विकास होता गया उतनी ज्यादा शक्ति आती गई किंतु शांति खोती चली गई क्योंकि कला का विकास उसी अनुपात में नहीं किया गया।


आज मीडिया खासकर सोशल मीडिया बहुत बड़ी अशांति का कारण बन गई है क्योंकि इतनी अद्भुत शक्ति का सदुपयोग करने की कला बहुत कम लोगों के पास है।


जिस भारत में मेडिकल-किट के अभाव में लाखों जिंदगी चली गई,वहां टूल-किट में लोग पारंगत होते जा रहे हैं। दिल को सुकून देने वाली खबरें आटे में नमक के बराबर मिलती है। खासकर सोशल मीडिया के द्वारा नफरत के बीज बोए जा रहे हैं और भ्रम फैलाए जा रहे हैं।


ऐसे में "क्या सुनें और क्या बोलें" की कला में पारंगत नहीं हुआ जाए तो मन की भूमि पर बहुत ज्यादा खरपतवार उग आएंगे। क्योंकि बिना बोए और बिना खाद-पानी के खरपतवार अपने आप उग आते हैं; और बार-बार उखाड़ने पर भी उखड़ नहीं पाते; जबकि गुलाब को बहुत जतन से खिलाना पड़ता है।


व्हाट्सएप-यूनिवर्सिटी में जो विचारों का आदान-प्रदान होता है,उनमें अधिकतर पूर्वाग्रह, दुराग्रह और हठाग्रह से ग्रसित होते हैं। उनका उद्देश्य मन को विराट बनाना नहीं है बल्कि संकीर्ण करते जाना है। अतः विज्ञान जहां पूरी दुनिया को ग्लोबल विलेज बनाने में सफल रहा वहां पर कला ग्लोबल व्यूज़ (वैश्विक-विचार)देने में पिछड़ गई।


महामारी के इस वक्त में जब लोगों का मन बहुत कमजोर पड़ गया है,उस समय कला और साहित्य की भूमिका मन को सुकून और शांति देने में अद्भुत हो सकती हैं। आइसोलेशन में रहने में मदद शांति ही कर सकती है। अतः उसी बात को सुनें और बोलें जो मन की शांति बढ़ाती हो। यह विपदा स्वाध्याय का और जीवन की कला सीखने का स्वर्णिम अवसर है। अतः हर बात को सुनने, बोलने और फॉरवर्ड करने से पहले मन के तराजू पर तौल लें कि वह मन की शांति को बढ़ा रही है या अशांति को-


"बात कहनी हो अगर सख्त भी,नरमी से कहो,


लफ्ज कांटों की तरह दिल में खटक सकते हैं।


जगमगाने पर न इतराएं सितारों से कह दो,


रोशनी पाएं तो जर्रे भी चमक सकते हैं।।"


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹