संवाद


"पर्यावरण के सुंदर लाल"


पर्यावरण-दिवस(5जून) 2021 की थीम है- "Eco-system restoration" अर्थात् पारिस्थितिकी-तंत्र को पुनर्जीवित व पुनर्स्थापित करने के लिए इस बार का पर्यावरण-दिवस समर्पित है ‌।


इस उद्देश्य हेतु जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया उन पर्यावरण के गांधी "सुंदरलाल बहुगुणा" की कोरोना से मृत्यु हो गयी किंतु वे अपने पीछे अमर संदेश पीढ़ियों के लिए छोड़ गए। वह संदेश है- "पेड़-पौधे और पशु-पंछी भी उतने ही महत्वपूर्ण है जितने मनुष्य, अत: प्रकृति के साथ जीने की जरूरत है,प्रकृति को जीतने की नहीं।"


प्रकृति को जीतने के प्रयास का नतीजा यह हुआ कि हवा जहरीली हो गई, पानी प्रदूषित हो गया, हरी-भरी पृथ्वी वीरान हो गई और आकाश में सुराख हो गया। एक तरफ महामारी और दूसरी तरफ तूफान ने जब हमें तोड़ कर रख दिया है तब एक सवाल बार-बार हर मस्तिष्क में उठ रहा है कि "यह किस कर्म की सजा हम भुगत रहे हैं?"


"पेड़-पौधों को काट डाला और पशु-पंक्षियों को मार डाला।


नतीजा सामने आने पर पूछते हो, कहां है दुनिया का रखवाला??"


हमने पेड़ काट डाले, पहाड़ों में सुरंग बना दिए और नदियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया; इससे बड़ा पाप और क्या होगा?


बहुगुणा जी ने पेड़ों को बचाने के लिए "चिपको आंदोलन" शुरू किया , बड़े बांधों के विरुद्ध अनशन पर उतर गए और पर्यावरण के दुश्मनों के प्रति जन-आंदोलन खड़ा करके 'पर्यावरण के प्रहरी' बन गए।


देवभूमि हिमाचल प्रदेश में पांच बार जाने का अवसर मुझे मिला किंतु जब कभी भी गया तो पाया कि विकास के नाम पर कभी देवभूमि की बांहें काट दी गई हैं तो कभी छाती में छेद कर दिया गया है तो कभी पैर काट दिए गए हैं। अभी 4 वर्ष पूर्व जब शिमला गया था तो वहां पर सिक्स (6) लेन रोड निर्माण का कार्य चल रहा था। काटे गए पेड़ों को देखकर मुझे पता नहीं चल रहा था कि यह निर्माण कार्य है या विध्वंस कार्य?


आए दिन बादल का फटना,भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाएं कुछ कहना चाह रही है किंतु इसे सुनने के लिए बहुगुणा के कान चाहिए और पहाड़ों का दर्द महसूस करने के लिए उनके जैसा हृदय चाहिए। पीने के पानी की कमी को देखकर वे चावल नहीं खाते थे क्योंकि उसको उगाने में बहुत ज्यादा पानी की खपत होती है।


"वृक्षमित्र-बहुगुणा" ने पूरी जिंदगी समर्पित कर दी प्रकृति को बचाने के लिए; क्या हम सबका यह दायित्व नहीं हैं कि जिंदगी के कुछ भाग समर्पित करें उनके जीवन संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए?


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹