संवाद


" फ्लाइंग सिख का योग"


'योग' शब्द का अर्थ समझना हो तो मिल्खा सिंह से अच्छा उदाहरण ढूंढना मुश्किल है। उनका जीवन बताता है कि महामारी है,तो वहां महाजीवन भी छुपा हुआ है।


विभाजन के समय बचपन में उनकी आंखों के सामने दंगाइयों ने उनकी माता-पिता और भाई-बहन सहित परिवार के पांच जनों की हत्या कर दी। जान बचा कर वे भागे और शरणार्थी शिविर में शरण ली।


निराश,हताश और टूट चुके जीवन में इतनी बड़ी उड़ान बाकी थी कि वह शख्स जीते जी किंवदंती बनेगा; किसी ने सोचा न था।


किंतु मृत्युपूर्ण जीवन में भी अमरता का बीज छुपा हुआ है, इस बात का आभास मिल्खा को हुआ और उन्होंने उस बीज को संकल्प, साहस और समर्पण से बड़ा किया।


दंगा रुपी घृणा की आग ने उन्हें दौड़ाया किंतु दौड़कर वे प्रेमरुपी मंजिल तक पहुंचे ; तभी तो उनको प्रेम करने वाले अनगिनत लोग सभी जगह मिले। *जिस पाकिस्तान की धरती पर उन्हें गहरे जख्म मिले थे,वहां प्रेम का सेतु बनाने के लिए प्रथम प्रधानमंत्री पं.नेहरु के कहने पर वे गए। उनकी अद्भुत दौड़ देखकर पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने उन्हें "फ्लाइंग सिख" की उपाधि से नवाजा।


ओलंपिक में चार सौ मीटर की रेस में चौथे स्थान पर आने के बावजूद भी उनकी दी हुई टाइमिंग 40 सालों तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनी रही।


'योग: कर्मसु कौशलम्" को जीवन का आधार बनाकर वे आगे बढ़ते रहे।


जिस समय खेलों के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं था, उस समय में सारे अभावों के बावजूद खेल की दुनिया में उनकी उपलब्धि बताती है कि कुछ परिंदे ऐसे होते हैं जो परों से नहीं, बल्कि अपने हौंसलों से उड़ान भरते हैं।


उनके निधन के साथ मरणधर्मा शरीर का तो अंत हो गया किंतु अंधेरे में भी उजाले की ओर दौड़ने वाली उनकी आत्मा इस मिट्टी के कण-कण में व्याप्त हो गयी ताकि पल-पल अनगिनत आत्माएं उनसे प्रेरणा प्राप्त कर सकें- -भावभीनी श्रद्धांजलि


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹


योग दिवस की शुभकामना।