जनसंख्या-विस्फोट सबसे बड़ी महामारी
July 11, 2021संवाद
"जनसंख्या-विस्फोट सबसे बड़ी महामारी"
कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है और तेजी से अपने पैर पसार रही है। कारण स्पष्ट है-लापरवाही की बढ़ोतरी और दूरी का अभाव।
बाजारों में और आयोजनों में भारी भीड़ को देखते हुए चेतावनी जारी की जा रही है किंतु उसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
इसका मूल कारण यह है कि जनसंख्या इतनी ज्यादा हो चुकी है कि हर जगह हर व्यक्ति सभा में खड़ा है।
इतिहास में कई जातियां अपनी जनसंख्या आधिक्य के कारण विलुप्त हो गईं।
संसाधन कम और जनसंख्या अधिक होने के कारण मानवीय गरिमा के अनुसार जीवन मुश्किल होता जा रहा है।
तथाकथित शिक्षा वह समझ पैदा नहीं कर सकी कि लोग अपने आप से जनसंख्या को नियंत्रित करने का प्रयास करें। तभी किसी शायर ने कहा-
"बी.ए किए बीबी लाए,बच्चे किए और मर गए
दुनिया की आबादी में और इजाफा कर गए।"
और सरकारें अब जनसंख्या नीति बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
पीने को शुद्ध पानी नहीं, श्वास लेने को शुद्ध हवा नहीं, रहने को जगह नहीं ,जीने को सबको अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य नहीं; फिर भी जनसंख्या बेतहाशा गति से बढ़ रही है तो यह हमारे पूर्ण विनाश की सूचना है।
ऑक्सीजन के अभाव में लोगों को हम सभी ने सड़क पर तड़प-तड़प कर मरते देखा है; जनसंख्या नियंत्रण के लिए तुरंत सख्त कदम नहीं उठाया गया तो लोगों को एक दूसरे को मारते और जंगली जानवरों की तरह खाते देखने का भी दिन आ जाएगा। संसाधन कम और संख्या अधिक हो तो मानव दानव बन जाता है।
दान, परोपकार,पशु-पंक्षियों के प्रति प्रेम व करुणा जैसे मानवीय मूल्यों की ऊंचाई उस समाज में देखने को मिलती हैं जहां समृद्धि ज्यादा और संख्या सीमित हो।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹