संवाद


"धंधा का गंदा होना जरूरी नहीं"


गंदी फिल्में बनाने के आरोप में समाज का एक धनवान और सामर्थ्यवान चेहरा गिरफ्त में है। काम-धंधे की जरूरत तो दुनिया में हर एक को है किंतु किसी गंदे धंधे से अर्थोपार्जन अंततःआपको बंधन देता है।


अतः सम्यक-आजीविका पर बुद्ध पुरुषों का इतना जोर रहा है। गलत धंधे में लिप्त लोगों की पीड़ा का कोई अंत नहीं। वे प्रतिपल अपने राज को बनाए रखने के लिए बहुत तनाव झेलते हैं और फिर भी रहस्य-उद्घाटन हो जाता है। फिर सारी इज्जत मिट्टी में मिल जाती है तथा कमाया हुआ धन भी।


सबसे बड़ा पाप तो इनका यह है कि इनकी बनाई अश्लील फिल्मों को देखकर मन बेकाबू होकर कुमार्गगामी हो जाता है,जिससे समाज में कई प्रकार के अपराध बढ़ते हैं।


कबीर जुलाहे का काम करते हुए, गोरा कुम्हार का काम करते हुए और सैनी नाई का काम करते हुए अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति लायक धन भी प्राप्त कर लिए और परमधन भगवान को भी प्राप्त कर लिए। वे स्वयं तो मुक्त हुए ही और करोड़ों को मुक्ति के रास्ते पर प्रेरित कर गए।


किंतु राज कुंद्रा जैसे सफेदपोश लोग चकाचौंध की दुनिया में रहते हुए भी अंधकारपूर्ण जीवन जीते हैं और असंख्य लोगों का जीवन नर्क बना देते हैं। दुनिया को ऐसा लगता है कि इनके पास सब कुछ है-धन,पद,प्रतिष्ठा; किंतु इनसे ज्यादा कंगाल व्यक्ति ढूंढना मुश्किल है।


बड़े महलों, बड़ी गाड़ियों और बड़ी पार्टियों में जीने वाले इन लोगों का जीवन दूर से स्वर्ग के समान लगता है *किंतु इनके हृदय में हर समय सतत रूप से जो नरक चल रहा है, उसको देखने वाली आंखें पैदा करने की जरूरत है। और उसको समाज के सामने लाने की जरूरत है,* अन्यथा नई पीढ़ियां इन्हें आदर्श बनाकर बर्बादी के रास्ते पर जा रही है।


प्रकृति प्रदत्त कामनाओं की पूर्ति धर्मानुकूल अर्थ से भी हो सकती है और मोक्ष के रास्ते पर ले जा सकती है।


गांधी जी कहा करते थे कि असंयमित भोग को व्यक्ति नहीं भोगता है बल्कि भोग ही व्यक्ति को खा जाता है।


महामारी ने जीवन के सामने कई चुनौतियां प्रस्तुत की हैं -उनमें आजीविका का छीन जाना और आय का कम होना भी है।उनका सामना "सादा जीवन, उच्च विचार" के रास्ते पर चलकर ही किया जा सकता है।


किंतु जब समाज के अग्रगण्य लोग अर्थ और काम के पीछे अंधों की तरह भागेंगे तो समाज में इतना अनाचार और व्यभिचार बढ़ जाएगा कि इस समाज में जीना मुश्किल हो जाएगा-


"इस नित्य बदलती दुनिया में,


मानव! तू कितना धन कमाएगा?


कितनी भी दौलत जुटा मगर


तू खाली हाथ ही जाएगा ‌।।"


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹