दुर्भावना के कांटों के बीच सद्भावना का फूल
August 20, 2021संवाद
"दुर्भावना के कांटों के बीच सद्भावना का फूल"
सद्भावना के कारण स्व.राजीव गांधी की हत्या करने वाली नलिनी को भी उनका परिवार माफ कर देता है और दुर्भावना के कारण तालिबान बेगुनाहों, स्त्रियों व मासूमों का भी खून बहा देता है।
भावना तो हर एक के अंदर होती है किंतु 'उसे दिशा और दशा कैसी मिलती है',इस पर निर्भर करता है कि वह सद्भावी होगा या दुर्भावी।
अत: जीवन के आरंभ में विचार से भी ज्यादा भावना पर ध्यान दिया जाता है। बालक का मन कोरे कागज की तरह होता है। ज्ञान के मंदिर में प्रेम और प्रार्थना द्वारा उसके भाव को व्यापक बनाया जाता है।
गांधी के हृदय में एक भाव ने जगह बना ली कि हम सभी एक ईश्वर की संतान है। फिर प्रत्येक दिन प्रार्थना के द्वारा उन्होंने इस भाव को पल्लवित-पुष्पित किया।इसी एक भाव से उनका प्रेम और अहिंसा का विचार आगे बढ़ा।
तालिबान का अर्थ ज्ञानार्थी होता है। किंतु उनके ज्ञान के केंद्र में ज्ञानार्थी के हृदय में प्रेम की जगह घृणा का भाव भरा गया और मस्तिष्क में कट्टर व संकीर्ण विचारधारा द्वारा उसे वैचारिक आधार प्रदान किया गया। तभी तो वे अपनों के प्रति और विशेषकर महिलाओं के प्रति इतना क्रूर और हिंसक व्यवहार कर पाते हैं।
एक तरफ भारत में सैन्य स्कूलों में और सेना की नौकरियों में भी बालिकाओं के लिए दरवाजे खोले जा रहे हैं तो दूसरी तरफ संकीर्ण विचारधारा के कारण महिलाओं पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं-
"मैं महकती हुई मिट्टी हूं किसी आंगन की
मुझको दीवार बनाने पर तुली है दुनिया
लोहे को गलाकर जो मैंने खिलौने ढाले
उनको हथियार बनाने पर तुली है दुनिया।।"
इसका प्रभाव यह होता है कि दुर्भावना वाले क्षेत्र से सद्भावना वाले क्षेत्र की ओर पलायन होता है, भले ही शरणार्थी के रूप में रहने को जगह मिल जाए।
सद्भावना के जगत में अभाव के बावजूद स्वर्ग बसता है और दुर्भावना के जगत में समृद्धि के बावजूद नरक।
'शिष्य गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे
सद्भावना दिवस की शुभकामना 🙏🌹