I love U कोरोना
August 27, 2021संवाद
"I love U कोरोना"
यह वाक्य पढ़कर या सुनकर आपको अजीब सा लगेगा और आपको विश्वास नहीं होगा।जब मेरे कानों में यह वाक्य पड़ा तो मुझे भी विश्वास नहीं हुआ कि कोई निर्दयी-निष्ठुर कोरोना के लिए भी 'आई लव यू'कह सकता है। लेकिन जब ठहर कर ठहाके लगाते उन किशोरों की बातों को गौर से सुना तो पता चला कि बोर्ड परीक्षा में बिना परीक्षा दिए उनकी उम्मीद से भी ज्यादा अंक आए थे। एक तरफ सालों की मेहनत और दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षा का तनाव दोनों से बचकर वे प्रथम श्रेणी में अच्छे अंक पाने की खुशी पचा नहीं पा रहे थे।
जब कॉलेज की परीक्षा में अंतिम समय में भारी भरकम लेट फीस भरकर भी परीक्षा केंद्र पर अंतिम समय में विद्यार्थी पहुंच रहे थे तो उनके मन में भी पिछले साल के प्रमोशन के बाद इस साल की नाममात्र की परीक्षा से बड़ा मजा आ रहा था। वे तो इस भाव से भरे थे कि कोरोना के काल में कुछ भी लिख दो, अच्छे अंक आएंगे ही।
अभी तक जेहन में यही एक बात घूम रही थी कि कोरोना ने कई घर उजाड़ दिए किंतु कोरोना ने कई दिलों को सुकून पहुंचा दिया, यह बात तो अब पता चली।
कई छोटे बच्चे भी अगली कक्षा में बिना परीक्षा दिए प्रमोट किए जाने पर मस्ती से झूम उठे और नाचने लगे।
बुरी से बुरी घटना में भी कोई सुखद पहलू छिपा होता है,यह बात किताबों में पढ़ता आया था लेकिन जिंदगी में इस बार दिखाई दिया।
शत-प्रतिशत परिणाम और बिना मेहनत अच्छे अंक प्राप्त करने की खुशी को देखकर मेरे मन में एक आशंका घिरने लगी है कि कहीं ये लोग तीसरी लहर के लिए पूजा-पाठ और प्रार्थना नहीं शुरु कर दें।
"अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काम
दास मलूका कह गए सबके दाता राम।"- ऐसी सोच रखने वाली संस्कृति में राम-भरोसे जीवन जीने वाले लोग तो कई मिल जाएंगे; लेकिन कोरोना-भरोसे लोग भी मिलेंगे, ऐसा सोचा न था।
लेकिन जब आपदा में अवसर तलाशते लोगों को देखा और अट्टहास करते इनके साक्षात दर्शन हुए तो तुलसी बाबा याद आ गए-
"तुलसी इस संसार में भांति- भांति के लोग
सबसे हिलमिल बोलिए नदी-नाव संजोग।।"
'शिष्य-गुरु संवाद'से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹