बिहार का शुभम UPSC-Topper बांसवाड़ा में भी संभव
September 29, 2021संवाद
"बिहार का शुभम UPSC-Topper बांसवाड़ा में भी संभव"
शुभम की उपलब्धि का संदेश है- संकल्प का,साहस का, श्रम का। प्राचीन काल से शिक्षा की धरती रही बिहार की प्रतिभाएं ज्ञान प्राप्ति के लिए बहुत बड़ा त्याग और बहुत कड़ी तपस्या करती हैं। उनका जीवन-मंत्र है-
"कुछ लिख कर सो,
कुछ पढ़ कर सो ।
तू जिस जगह जागा सवेरे,
उस जगह से बढ़कर सो।"
पहले जहां लोग दूर-दूर से बिहार पढ़ने आते थे वहां आज बिहारियों को अपना खेत-खलिहान बेचकर दूसरे राज्यों में जाकर ज्ञान प्राप्ति के लिए अनेक प्रकार के कष्ट सहने पड़ते हैं। लेकिन वे जहां जाते हैं वहां पर एक शैक्षिक वातावरण का निर्माण कर देते हैं।
ऐसी ही प्रतिभाओं की संगति मिलने से मेरा जीवन बदला। जहां मेरा समय 10 घंटा खेलने में व्यतीत होता था, वहां पढ़ने-वाले-लोगों के साथ उठने-बैठने से पढ़ाई में गति करने लगा।
आज मैं जो कुछ हूं, शिक्षा के प्रति समर्पित उन लोगों के कारण हूं जिन्होंने मुझे सिखाया कि गरीबी अभिशाप की जगह वरदान बन जाती है क्योंकि अच्छी किताबों की संगति में अभाव का जीवन भी अमीर का जीवन लगने लगता है।।
बांसवाड़ा के विद्यार्थियों में मैंने वही गरीबी देखी। एक शिक्षक के रुप में मैं इन विद्यार्थियों को इस गरीब जीवन से निकलकर अमीर बनने का वही शुभ-पंथ बताते आ रहा हूं, जो मैंने अपने मार्गदर्शकों से पाया था- पुस्तक ही माता-पिता,बंधु-मित्र सब कुछ है।
यदि कोई पुस्तकों में रुचि जागृत कर दे तो पुस्तकों से सुंदर दुनिया और कहीं नहीं मिलती हैं। क्लास-टीचिंग और शिष्य-गुरु संवाद को एक धर्म के रूप में शिक्षालय में प्राथमिकता पर लाने का प्रयास हमारे टीचर्स और सीनियर्स किया करते थे।
एक तरफ बिहार के लोग मजदूरी के लिए दूर के प्रदेशों में जाने को मजबूर हैं तो दूसरी तरफ बिहार की प्रतिभाएं भी वहां से बाहर निकलकर दूसरे प्रदेशों के उच्च पदों पर आने के लिए मशहूर हैं। बिहार का शुभम इस साल का यूपीएससी टॉपर बने तो मेरे दिलो-दिमाग में यही एक प्रश्न गूंजने लगा कि उर्वर धरती होने के बावजूद बिहार इतना पिछड़ा क्यों है? बांसवाड़ा के संदर्भ में भी यही प्रश्न मेरे दिमाग में गूंजता रहता है- उर्वर धरती होने के बावजूद बांसवाड़ा इतना पिछड़ा क्यूं है?
कारण स्पष्ट दिख रहा है कि बिहार की व्यवस्था ऐसी है कि न तो अपनी श्रम शक्ति का उपयोग कर पा रही है और न अपनी मानसिक शक्ति का। देश का हर १२वांआईएएस बिहार से आता है और दूसरे प्रदेशों में बन रही बड़ी इमारतों के नींव के ईंट बिहारी-मजदूर रखता है।
बिहार से पलायन के लिए जो स्थितियां जिम्मेवार हैं, वैसी ही परिस्थितियां देश से प्रतिभा- पलायन( Brain-drain) के लिए भी जिम्मेदार हैं।
कोई भी राज्य या देश गरीब बना रह जाता है,जब तक वो अपनी श्रम शक्ति या मानसिक शक्ति का सदुपयोग करने की अनुकूल परिस्थितियां नहीं जुटाता।
भारत के मजदूरों को अपने उपनिवेशों में ले जाकर ब्रिटिशों ने जो श्रम करवाया ,उसके कारण कई देशों की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ। बाद में उन्हीं मजदूरों की पीढ़ियां अपने संघर्ष और समर्पण के कारण आज वहां के शीर्ष-पदों को सुशोभित कर रही हैं।
अमेरिका जैसा देश यदि महाशक्ति बना है तो उसके विकास में भारत की प्रतिभाओं का अमूल्य योगदान है। उन्हीं प्रतिभाओं में से एक भारतीय मूल की कमला हैरिस आज वहां की उपराष्ट्रपति हैं।
बिहार हो या बांसवाड़ा या कोई और अन्य क्षेत्र; वहां की प्रतिभाओं को तराशने के लिए अच्छी शिक्षा और शिक्षक मिले तो शुभम हर जगह पैदा हो सकते हैं।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹