संवाद


"नपुंसक-सफलता"


एक होनहार छात्रा अपने मामा के बेटे को अच्छी कोचिंग दिलाने के महान उद्देश्य को ध्यान में रखकर पटवारी परीक्षा में डमी-कैंडिडेट बनने को लाख रुपए के बदले में तैयार हो गई और पकड़ी गई;जबकि उसका RAS एग्जाम 27 को है।


प्रतिभा होने के बावजूद निश्चितरूपेण ऐसे विद्यार्थियों में विवेक की कमी है। तभी तो बड़ी परीक्षाओं को पास करने की काबिलियत होने के बावजूद गलत मार्ग पर जाने के कारण अपनी बड़ी मंजिल प्राप्त करने से उसे वंचित होना पड़ेगा; इतना ही नहीं जेल में भी सड़ना पड़ेगा।-


जमीं पे चल न सका और आसमान से भी गया


कटा के पर को परिंदा उड़ान से भी गया।।


विवेक कहता है कि बीज ज्यादा महत्वपूर्ण है वृक्ष से क्योंकि वही वृक्ष बनेगा और उसी पर फल भी लगेंगे।


मार्ग ज्यादा महत्वपूर्ण है मंजिल से क्योंकि सही मार्ग पर चलते रहने से मंजिल एक दिन आपके कदमों के नीचे होगी, बस थोड़ा धैर्य चाहिए।


बुद्ध ने भी अष्टांगिक-मार्ग पर जोर दिया, मंजिल पर नहीं।


गीता में भी कर्म पर जोर दिया गया है, फल पर नहीं।


आजकल चुनाव जीतने के बाद कोई भी नहीं पूछता कि कितने गलत मार्गों से विजय हासिल हुई है। बस जीत महत्वपूर्ण हो जाती है।इसके प्रभाव से जो वातावरण निर्मित हुआ है, उसमें सफलता ही एकमात्र मूल्य रह गया है, साधन या मार्ग चाहे जितना गलत हो।


इस कारण से मुन्ना-भाईयों के साथ मुन्नी-बहनों की भी संख्या बढ़ने लगी हैं। विशेषकर लड़कियों के पतन का यह संकेत बहुत खतरनाक है क्योंकि उनकी परवरिश विशेष देखरेख में होती है।


गांधी साधन और साध्य दोनों की पवित्रता पर जोर देते थे। सत्य-अहिंसा-प्रेम के सही मार्ग पर चलने के कारण ही उनके आंदोलन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी बड़ी संख्या में जुड़ सकीं।


गलत मार्गो से भी लोग सफलता प्राप्त कर लेते हैं।लेकिन गहरी समझ वाले विवेकशील लोग कहते हैं कि एक तो ऐसी सफलता चिरस्थाई नहीं होती और दूसरा गलत रास्तों से सफल हुआ व्यक्ति कभी चैन से सो नहीं पाता। क्योंकि बीज तो उसने बबूल का बोया ,उस पर आम कैसे लगेंगे?


तभी तो गलत तरीके से फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी में आने के बाद भी कई सरकारी कर्मचारी पकड़े जा रहे हैं और उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है। गलत तरीकों से सफलता प्राप्त करने के कारण वे हमेशा भयभीत और सशंकित मन:स्थिति में होते हैं क्योंकि वे तो असलियत जानते ही हैं। ऐसे लोगों को सुख-शांति-सुकून कहां?


फिर ऐसी नपुंसक-सफलता का क्या मतलब??


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹