संवाद


" ला ला वाली दुनिया को दा दा सिखाने वाला"


दुनिया इतनी बुरी नहीं है जितनी बुराइयों को दिखाकर और चर्चा कराकर दुनिया को बुरा बता दिया जाता है। अभी "लंगर बाबा" के नाम से मशहूर श्री जगदीश लाल आहूजा जी का निधन हुआ जो 40 वर्षों से लोगों को नि:शुल्क खाना खिला रहे थे। उनके बारे में समाचारपत्र में बिना फोटो की महज 4 लाइनें छापी गईं और उनके अगल-बगल पूरे पृष्ठ पर दुराचार,व्यभिचार,भ्रष्टाचार और विवाद की खबरें फोटो सहित विस्तार से प्रस्तुत की गई।


जिस दुनिया में लोग ला ला (bring, bring) करते हुए अतृप्त मरते हैं,उस दुनिया में यह शख्स दा दा (give give) का जीवन जीते हुए बहुत तृप्ति के साथ हम से विदा ले लेता है। उनकी सेवा के बदले जब पद्मश्री पुरस्कार दिया गया था तो उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि मेरे मरने के बाद भी मेरे द्वारा शुरू किया गया यह लंगर चलता रहे।


आंखों के रास्ते उनके देहावसान का यह संक्षिप्त समाचार मेरे हृदय में उतर कर विस्तार पाने लगा। मुझे पता चला कि विभाजन के समय की त्रासदी को झेलते हुए झंझावातों के बीच यह शख्स बड़ा हुआ। पेशावर से भागकर यहां आने के क्रम में परिजनों की मृत्यु हो गई और अपना पेट भरने के लिए नमकीन बेचने हेतु पैदल चलने के क्रम में उनके पैरों में फफोले पड़ जाया करते थे।


इतनी बड़ी पीड़ा जिसको वक्त ने दी हो, उसको परमात्मा इतना बड़ा दिल दे देता है कि करोड़ों की संपत्ति बेचकर ढाई हजार लोगों को प्रतिदिन पेट भरने का पिछले 19 वर्षों से नियमित आयोजन उनके द्वारा किया जा रहा था।


"ख्वाहिश हो तो काम बहुत हैं,


जीवन के पैगाम बहुत हैं।


इश्क नहीं है सबकी मंजिल


नाम से तो गुलफाम बहुत हैं।।"


ऐसे लोग जिस दुनिया में रहते हों, वो दुनिया बुरी कैसे हो सकती हैं? बुरी हमारी दृष्टि है,बुरा हमारा चुनाव है,बुरी हमारी चर्चा है जो सदा दुराचारी,भ्रष्टाचारी,व्यभिचारी और विवादों में रहने वाले लोगों पर दृष्टिपात करती हैं और उनको विस्तार से कवरेज देती हैं।


न्यूज़पेपर और टीवी चैनलों ने जो दुनिया बनाई है,उसमें अच्छाई आटे में नमक के समान दिखती है। थोड़ी बहुत इसमें सच्चाई भी हो तो यह थोड़ा सा नमक संसार को और जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए ऑक्सीजन के समान है,जो प्रतिशत में कम रहते हुए भी प्राणों का आधार है।


अगली पीढ़ियों तक ऐसे लोगों की बातें शिक्षा-जगत द्वारा विस्तार से अवश्य पहुंचाई जानी चाहिए ताकि विराट और उदार हृदय वाला जगत निर्मित हो सके।


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे


विनम्र श्रद्धांजलि🙏🌹