सर्वप्रिय अटल जी
December 25, 2021संवाद
"सर्वप्रिय अटल जी"
बड़ा दिन निश्चित रूप से ईसा मसीह जैसी बड़ी आत्मा के जन्म लेने से विशेष हो जाता है किंतु भारतीय राजनीति के लिए भी यह बड़ा दिन इस मायने में है कि अटल बिहारी जैसी आत्मा का जन्मदिवस है,जिसे विरोधी दल के लोग भी उतने ही प्यार और आदर के साथ याद करते हैं,जितने अपने दल के लोग।
आज की राजनीति को देखने वाली पीढ़ी यह विश्वास ही नहीं करेगी कि वाजपेयी जी की सरकार एक वोट को मैनेज नहीं कर पाने के कारण गिर गई। सरकारों के पास इतनी शक्ति और संसाधन होते हैं कि व्यक्ति तो क्या, दलों को अपने पक्ष में कर लेते हैं।
किंतु मूल्यों की राजनीति और विशाल हृदय के कारण जिस प्रकार से शास्त्री जी सर्वप्रिय थे,उसी प्रकार से अटल जी भी। राजनीति के लिए एक विचारधारा से जुड़ना मजबूरी है किंतु व्यक्तित्व को इतना विराट बनाया जा सकता है कि विरोधी भी इस बात को तरसें कि काश!ये मेरी पार्टी में होते।
यदि विचारधारा की राजनीति होती है तो एक दूसरे को मिटाने की जरूरत नहीं पड़ती है। कांग्रेस में कई विचारधारा के लोग थे,जो अपने- अपने रास्ते से भारत माता की स्वतंत्रता के लिए आगे बढ़ रहे थे; एक दूसरे से असहमत भी होते थे और स्वाधीनता के मुद्दे पर पूर्ण सहमति भी रखते थे।
यूएनओ में भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्षी पार्टी के नेता वाजपेयी जी को सादर आमंत्रित करने वाली राजनीति प्रतिभा को आदर देती थी। और अटल जी भी सत्ता पक्ष के अच्छे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करने वाला हृदय रखते थे।
आज स्थिति यह हो गई है कि एक नेता की प्रशंसा कर दो तो दूसरे नेता के अनुयायी आपको दुश्मन समझ बैठते हैं। जबकि हर पार्टी में प्रतिभाशाली लोगों की कमी नहीं है। कमी तो इस सोच में है कि हम खुलकर प्रतिभाओं के पक्ष में खड़े नहीं होते और मूल्यों की राजनीति का सम्मान नहीं करते।
प्रतिभाशाली अटल बिहारी मूल्यविहीन-राजनीति को देख कर कभी-कभी इतना दुखी हो जाते थे कि उनका कवि-हृदय छलक जाता था-
"बेनकाब चेहरे हैं , दाग बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज,सच से भय खाता हूं
लगी कुछ ऐसी नजर, बिखरा शीशे सा शहर
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं।"
परमात्मा से प्रार्थना है कि भारतीय राजनीति में मूल्यों के लिए अटल रहने वाले और सबके हृदय में जगह बनाने वाले बिहारी और भी उभरते रहें।
शिष्य-गुरु संवाद से डॉ.सर्वजीत दुबे
Happy Christmas day
आदरपूर्ण श्रद्धांजलि🙏🌹