विवेक है तो आप युवा
January 11, 2022संवाद
"विवेक है तो आप युवा"
विवेक हो तो युवावस्था जीवन को गढ़ने के लिए और स्वयं को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लड़ती है और विवेकहीनता हो तो धर्म/जाति के नाम पर देश को तोड़ने के लिए आपस में ही झगड़ती है।
स्वामी विवेकानंद साहित्य की 2रुपए की पुस्तकें मेरे किशोरावस्था के दौरान रामकृष्ण मिशन आश्रम द्वारा 90 के दशक में उपलब्ध कराई जाती थीं। इतने कम मूल्य की पुस्तकों में इतना अमूल्य ज्ञान छिपा होता था कि गरीबी में भी अमीरी का अहसास होता था।
तंग गलियों वाले गंदे मोहल्ले में रहने के बावजूद थोड़ी दूर पर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के शुद्ध वातावरण में जाकर मन मजबूत और हृदय पवित्र हो जाया करता था।
"यदि तुम सारे देवी-देवताओं में भी विश्वास करते हो किंतु अपने आप में विश्वास नहीं करते; तो तुम्हारी मुक्ति नहीं हो सकती" -स्वामी जी की ऐसी पंक्ति पढ़कर परमात्मा से पहले स्वयं पर और अपने परिश्रम पर भरोसा जगता था।
इस युवा संन्यासी के विचार मुझे उन्हें धार्मिक-गुरु की अपेक्षा मनोवैज्ञानिक-गुरु ज्यादा मानने को प्रेरित करती हैं।
चरम बेरोजगारी और महामारी के काल में जब चारों तरफ अंधेरा है और रास्ता भटकाने का प्रयास चल रहा है तो स्वामी जी का संदेश आज के युवाओं को विवेक और आनंद के रास्ते पर ले जाएगा।
जब पिताजी का देहांत हो गया था और स्वयं की नौकरी न होने से घर की हालत खराब थी तब भी उन्होंने गुरु रामकृष्ण द्वारा काली माता का साक्षात्कार कराने पर अपने लिए नौकरी नहीं मांगी बल्कि विवेक और ज्ञान मांगा।
आज मंदिरों में जाकर क्या मांगा जा रहा है? आज धर्म के नाम पर क्या परोसा जा रहा है? - इन प्रश्नों पर विचार करेंगे और विवेकानंद साहित्य का अध्ययन करेंगे तो स्वामी जी की आध्यात्मिकता आपको ज्यादा वैज्ञानिक और व्यावहारिक लगेगी।
आज कितने धर्मगुरु ऐसे हैं जो यह कहने का साहस कर सकेंगे कि तुम गीता पढ़ने की अपेक्षा फुटबॉल के द्वारा स्वर्ग के अधिक समीप पहुंच सकोगे।
जब समाज धर्मांधता में जकड़ा हुआ था तब उन्होंने धर्म के पहले रोटी और देवालय के पहले शिक्षालय की आवश्यकता पर जोर दिया था।
भावी भारत के निर्माण में हिंदू मस्तिष्क और मुस्लिम शरीर की बात करने का साहस स्वामी विवेकानंद में ही हो सकता है,जो उन्हें चिर युवा बनाता है और सभी युवाओं के लिए प्रेरक व्यक्तित्व भी।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे
युवा दिवस की शुभकामना🙏🌹