प्रिय ऋजु!
March 25, 2022प्रिय ऋजु!
परीक्षा का समय नजदीक आ रहा है और तुम्हारी तैयारी भी ठीक चल रही है। किंतु प्रतियोगिता जितनी ज्यादा होती है, उतना ही ज्यादा संकल्प और समर्पण की जरूरत पड़ती है। साधना करते समय हमारी संस्कृति में गुरु की नजर बराबर शिष्य पर लगी रहती थी। जो ठीक चलता था उस पर गुरु कम बोलता था किंतु यदि कुछ कमी होती थी तो उस पर शिष्य को सावधान करता था।
तुमने नियमित रूप से सालों भर निरंतर पढ़ाई की है। यह नियमितता तुम्हारी बहुत बड़ी ताकत है। सही समय पर पढ़ने बैठ जाना और सही समय पर मनोरंजन के लिए समय निकाल लेना अच्छी बात है।
किंतु एक बात मुझे कहनी है और वह यह है कि पढ़ने के लिए आंखों पर स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी बहुत तनाव और दबाव बढ़ाती है। अतः उसी स्क्रीन पर मनोरंजन के लिए फिर से आंखें गड़ा देना, यह एक बात मुझे खतरनाक लगती है।
दूसरी बात की तबीयत खराब होने पर ज्यादा से ज्यादा आराम करना तो अच्छी बात है लेकिन परीक्षा के समय में भी स्वास्थ्य प्रतिकूल होने के कारण मन नहीं लगने पर समय काटने के लिए कोई गेम वगैरह खेलना वैज्ञानिक और बुद्धि संगत नहीं है।
अभी परीक्षा के समय में तनाव बढ़ेगा। सब कुछ मेहनत करने के बावजूद भी परमात्मा की कृपा के बिना मनोवांछित सफलता नहीं मिलती। अतः प्रत्येक दिन 10 मिनट ही ध्यान और प्रार्थना के लिए सुबह शाम निकाल सको तो तुमको प्रतिकूल परिस्थिति में धैर्य धारण करने के लिए यह महामंत्र बहुत काम आएगा।
जरूरी नहीं है कि सारी बातें मान लो किंतु एक बार पढ़कर इस पर सोचना जरूर। कई दिनों से बात करना चाह रहा था किंतु तुमको पढ़ाई के समय में बात करने के लिए बुलाना मुझे अच्छा नहीं लगा। अतः लिखकर अपनी बात कह दी।
शुभाशीष
24.3.22