कश्मीर-फाइल्स:उपयोग या दुरुपयोग?
April 7, 2022संवाद
"कश्मीर-फाइल्स:उपयोग या दुरुपयोग?"
सिकंदर की सेना लौटते समय अपनी तलवारों को रास्ते में छोड़ गई थी। सर काटने वाली तलवारें जब बौद्धों को मिलीं तो जंगलों को काट कर फसल उगाने वाली बन गईं।
"कश्मीर फाइल्स" को एक पक्ष यथार्थ बता रहा है तो दूसरा पक्ष अर्ध सत्य को अतिरंजित करने वाला। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक हो रहे विश्लेषणों को देखकर तथा पढ़कर मेरी जिज्ञासा और ज्यादा बढ़ गई।
एक तरह की सरकारें इसे टैक्स फ्री कर रही हैं और इस फिल्म को देखने के लिए सरकारी-अवकाश की घोषणा कर रही हैं तो दूसरे तरह की सरकारें इससे परहेज कर रही हैं ; ऐसे माहौल में मन की उधेड़बुन को शांत करने के लिए फिल्म देखना अनिवार्य हो गया।
"कश्मीर फाइल्स" को देखने के दौरान अंतिम दृश्य तक आते-आते गुमसुम सा होता जा रहा मन पूर्णतया मौन हो गया। कारण था कि यथार्थ की ऐसी मर्मान्तक अभिव्यक्ति की गई है कि मैं और मेरी पत्नी एक दूसरे के साथ सिनेमा हॉल पहुंचे थे लेकिन लौटने के समय तक निहायत अकेले-अकेले हो चुके थे।
एक तरफ कश्मीर की कोमल और सुंदर वादियां और दूसरी तरफ आतंकी-मन की क्रूर और कुरूप छवियों को देखकर विश्वास नहीं हो रहा था।
रात की नींद उड़ गई और यही सोचता रहा कि धर्म के नाम पर ब्रेनवाश कर दिए जाने पर अपने शिक्षक के सामने कोई छात्र इतना निर्दयी और निर्लज्ज आतंकी कैसे हो सकता है कि अपने शिक्षक के बेटे की हत्या करके उसके बहू को उसके खून से सना चावल खाने के लिए मजबूर करे और अपने टीचर को बेरहमी से लातें मारे?
सुख-दुख का साथी अपना पड़ोसी धर्म के नाम पर सारे अतीत को भुलाकर अपने पड़ोसी की ही हत्या कराने हेतु मुखबिर कैसे बन सकता है?
कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और विस्थापन की पीड़ा बहुत बड़ी सच्चाई है,जिसे हर एक को महसूस करना चाहिए।
अब कुछ लोगों की मांग है कि सिर्फ कश्मीर की ही फाइल क्यों? गुजरात,बंगाल,दिल्ली,केरल,पंजाब इत्यादि की फाइलों को भी यथार्थ रूप में जनता के समक्ष इसी प्रकार से लाया जाना चाहिए क्योंकि इन जगहों पर भी नरसंहार वैसा ही हुआ है।
जहां तक "कश्मीर फाइल्स" को लेकर इस्लामोफोबिया की भावनाएं भड़काने का और हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का आरोप लग रहा है,वहां तक एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि आग लगाना तो किसी के वश में हो सकता है किंतु हवाएं उस आग को किस दिशा में ले जाएंगी, यह किसी के वश में नहीं होगा -
"आग क्या चीज है ये तब समझे
जब आंच हमारे मकान में आई
मुझसे लिखा गया न कोई जवाब
जब जिंदगी इम्तिहान में आई।।"
एक पार्टी इसे अपना ब्रह्मास्त्र मान रही है तो दूसरी पार्टी इसे विभाजनकारी एजेंडा बता रही है। मेरी दृष्टि में इस मानवीय त्रासदी की कमोबेश केंद्र अथवा कश्मीर में सत्ता में रहने वाली सभी पार्टियां जिम्मेदार हैं।दुष्यंत के शब्दों में-
"इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके-जुर्म हैं
आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार
मैं बहुत कुछ सोचता रहता हूं पर कहता नहीं
बोलना भी है मना सच बोलना तो दरकिनार।"
'कश्मीर फाइल्स' को देखकर मानव होने के नाते मैं इतना शर्मसार हो गया कि मन में एक ही प्रश्न गूंजने लगा कि क्या कभी धर्म के नाम पर मैं भी इतना नीचे गिर सकता हूं?
किंतु 'कश्मीर-फाइल्स' में छिपे एक तरफा सत्य को संपूर्ण सत्य मानने से बचना चाहिए। मसलन एक विश्वविद्यालय और उसके प्रोफेसर को जिस प्रकार से भ्रम फैलाने वाली संस्था और पात्र के रूप में चित्रित किया गया है, उसको हजम कर पाना मुश्किल है क्योंकि जिस विश्वविद्यालय की तरफ इशारा है उस संस्था से कई ऐसी विभूतियां पैदा हुई हैं जिन पर देश को गर्व और गौरव हैं। इसी प्रकार सभी मुसलमान को आतंकी या उनका मुखबिर मानना भी बहुत मुश्किल है।
फिर भी मानवीय चेतना को झकझोर देने में 'कश्मीर-फाइल्स' सफल हुई है।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी फाइल्स के द्वारा यथार्थ या सत्य दिखाने का उद्देश्य क्या है?
यही न कि ऐसे अकल्याण की बातों या घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अतः आगे अन्य फाइल्स बनाते समय सत्य के साथ शिव को भी जोड़ा जाना चाहिए।
इसके बाद भी सामान्य जनता को अच्छा संदेश देने के लिए इसे सुंदर भी बनाया जाना चाहिए ताकि सबको प्रिय लग सके।
रामायण,रामचरितमानस और महाभारत जैसे अमर काव्य "सत्यम् शिवम् सुंदरम्" के सांचे में ढलकर 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' बन जाते हैं। इनसे यही संदेश मिलता है कि अपने ही अंदर छिपे देवत्व को और निखारने की जरूरत है तथा दानवत्व को और मिटाने की जरूरत है।
साहित्य समाज का सिर्फ दर्पण ही न बने बल्कि समाज का मार्गदर्शन भी करे।
यदि 'कश्मीर-फाइल्स' का उपयोग इतने व्यापक दृष्टिकोण से न हो तो यह मन को ऊंचाइयों पर नहीं ले जा सकेगा।
इसका दुरुपयोग करने पर चुनाव में थोड़ा बहुत फायदा हो सकता है लेकिन राष्ट्रीय और सामाजिक जीवन में घाटा ही घाटा होगा।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹