विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक-उपस्थिति की चुनौती
May 18, 2022संवाद
"विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक-उपस्थिति की चुनौती"
बिना नियमित रूप से उपस्थित हुए बीएड डिग्री पा लेने के खुलासे के बाद विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इस पर एक स्टूडेंट ने कुलपति को ई-मेल किया है कि हम स्टूडेंट दूर से आते हैं,हमें आने-जाने का किराया दिया जाए या बायोमैट्रिक अटेंडेंस के आदेश को रद्द किया जाए। स्थानीय समाचारपत्र में इस न्यूज़ को प्रमुखता से छापा गया।
इस ईमेल से वास्तविकता का पता चलता है और विद्यार्थी की सोच का भी पता चलता है। वास्तविकता और सोच दोनों को बदले जाने की जरूरत है।
विद्यार्थियों के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम अनिवार्य करना मेरी नजर में शुभ है। फर्जी अटेंडेंस से फर्जी डिग्री प्राप्त करने का सरल तरीका दीर्घावधि में बहुत नुकसानदेह साबित होता है। बिना योग्यता के यदि कोई डिग्री मिल जाती है तो उसी का परिणाम है कि छोटी-छोटी नौकरियों के लिए बड़ी-बड़ी डिग्री वाले भी अयोग्य साबित हो रहे हैं।
विद्यार्थी और विश्वविद्यालय दोनों को योग्यता-वर्द्धन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके लिए नियमित क्लास और योग्यतम शिक्षक मुख्य आधार बनेंगे। संस्कृत का एक श्लोक है-
"प्रथमेनार्जिता विद्या , द्वितीयेनार्जितं धनं"
अर्थात् यदि प्रथम-अवस्था में विद्या को अच्छी प्रकार से अर्जित नहीं किया तो द्वितीय-अवस्था में धन का अर्जन नहीं हो सकता।
आज बेरोजगारी का संकट चरम पर है क्योंकि बिना योग्यता अर्जित किए हुए डिग्री वाले युवा आजीविका अर्जन हेतु अपने को अक्षम पा रहे हैं।
विदेशों में तो अब डिग्री नहीं,योग्यता को और अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है।
अतः सभी विद्यार्थियों को अनिवार्य बायोमैट्रिक अटेंडेंस का स्वागत करना चाहिए और योग्यतम शिक्षकों की मांग उठानी चाहिए।
जहां तक आने-जाने के किराए की बात है, वह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। 90 के दशक की बात है कि राजस्थान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को आई कार्ड दिखाने पर किसी भी सरकारी या निजी बस या ऑटो में महज एक रुपए शुल्क देना पड़ता था और वे शहर में कहीं भी आ जा सकते थे। जीजीटीयू भी अपने विद्यार्थियों के लिए संबंधित विभागों से बात करके इस प्रकार की सुविधा का इंतजाम कर सकता है।
शिक्षा जगत में बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है। उसके लिए विद्यार्थियों को,शिक्षकों को,समाज को और सरकार को मानसिक रुप से अपनी तैयारी दिखानी चाहिए।
डिग्री बांटने वाले केंद्र के रूप में बदनाम हो चुका शिक्षा जगत योग्यता प्रदान करने वाले शिक्षा केंद्र के रूप में तब्दील हो, यह समय की मांग है।
फेल नहीं करने की नीति ने और संस्थान का रिजल्ट अच्छा से अच्छा दिखाने की रणनीति ने अपात्रों की बहुत बड़ी फौज खड़ी कर दी। यदि प्राथमिक स्तर से ही हर परीक्षा में पास करना आसान न रह जाए तो पीढ़ियां चुनौती स्वीकार करना शुरू कर देंगी और अपने लिए सही विकल्प का तलाश करना भी शुरू कर देंगी। इससे योग्यता और चयन की क्षमता बढ़ेगी। फिर आजीविका का संकट और चरित्र का संकट इतना भीषण नहीं रह सकता। ऋषि वचन है कि-
"पात्रत्वाद् धनमाप्नोति" अर्थात् पात्रता से धन की प्राप्ति होती है। इस धन में चरित्र रूपी धन भी शामिल है।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹