अभेद की दृष्टि से भाईचारा की सृष्टि
June 5, 2022संवाद
"अभेद की दृष्टि से भाईचारा की सृष्टि"
'हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना?' - "संघ-प्रमुख" का यह बयान इस वक्त के जख्म पर लगाया गया सबसे साहसी और प्रभावी मरहम है।
किंतु आज का सबसे बड़ा संकट "विश्वसनीयता का संकट" है। जख्मों को कुरेदने वाले वाक्यों पर तो लोग तुरंत विश्वास कर लेते हैं किंतु मरहम लगाने वाले वाक्यों पर प्रश्न उठाने लगते हैं और संदेह जताने लगते हैं।
किसी की पृष्ठभूमि कैसी भी हो, वर्तमान की समस्याओं के लिए दिए गए उसके 'उपयुक्त-समाधान' को नकार देने से समस्याएं और बढ़ जाएंगी।
भारत में तो कंकर कंकर शंकर है। ऐसे में शिवलिंग को मस्जिद में ही खोजने की प्रवृत्ति को हवा दे दिया गया तो विवादों का एक ऐसा पिटारा खुल जाएगा जिसमें देश बुरी तरह उलझ जाएगा। अतः "दृष्टि-परिवर्तन" आज के समय की मांग है।
हिंदू का मतलब होता है "सहिष्णु" और इस्लाम का अर्थ होता है "शांति" । हिंदू अपनी सहिष्णुता बढ़ाएं और मुसलमान शांति की खोज की ओर कदम बढ़ाएं , यह हर एक इंसान चाहता है।यदि अपने-अपने धर्म के मूल स्वरूप की खोजबीन में हम सभी लगें तो हिंदुस्तान की आबोहवा कुछ ऐसी होगी जो विश्व में अन्यत्र कहीं भी दुर्लभ होगी-
"अकीदत पर सवाल उठाने से पहले
थोड़ी सी नजर उठाकर तो देखो;
मोहब्बत में किसी के दर पे कभी
जबीं को बेगर्ज झुकाकर तो देखो।"
धर्म के बाह्यस्वरूप पर जब भी ज्यादा जोर दिया जाता है; बहुत बड़ा अंतर दिखाई देने लगता है और मतभेद बढ़ने लगते हैं।
यहां जितने प्रकार के मौसम और जितने प्रकार के लोग पाए जाते हैं कि दूसरी जगह बताने पर उनको विश्वास तक नहीं होता। इन सारी विविधताओं को जोड़ने वाला कोई धागा है जो अदृश्य है, फिर भी सदियों से अपने होने का प्रमाण देता आया है।
यदि किसी की दृष्टि सिर्फ विविधता पर है तो वह इस अदृश्य धागे को कभी देख नहीं पाएगा।
गंगा,जमुना,नर्मदा,माही जैसी अनेक नदियां भले ही भिन्न-भिन्न दिखती हों और भिन्न-भिन्न रास्तों से चलती हों किंतु सागर में गिरकर एक हो जाती हैं,उसी प्रकार से हिंदू,मुस्लिम,सिख,ईसाई की उपासना-पद्धतियां भले ही अलग-अलग दिखती हों किंतु भारत रूपी महासागर में मिलकर "एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति" का रूप ले लेती हैं।
'हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना?'-यह पहला कदम है। इसके बाद दूसरा कदम भी किसी के मुख से आएगा-"हर मानव में हिंदू मुसलमान क्यों देखना??"
भारत की सनातन संस्कृति तो इसके आगे भी जाती है-
"जो पाषाण है,उसमें भगवान है
ऐसी भावना-वाला तू इंसान है।।"
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे
विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामना🙏🌹