त्याग-शांति-समृद्धि का प्रतीक तिरंगा
August 12, 2022संवाद
"त्याग-शांति-समृद्धि का प्रतीक तिरंगा"
किसी भी राष्ट्र का प्रतीक-चिन्ह उसकी सभ्यता-संस्कृति की गहरी अनुभूतियों से निर्धारित होता है। तिरंगा भारतीयों के आन-बान-शान का प्रतीक है। भारत ने कभी धरती की गहराई और आकाश की ऊंचाई को एक साथ चूमा था। बाह्य जगत में समृद्ध भारत ने आंतरिक जगत में शांति को उपलब्ध किया था। अत: सोने की चिड़िया कहा जाता था। "सोना" प्रतीक है समृद्धि का और "चिड़िया" प्रतीक है आकाश में उड़ने की उमंग का। इसके मूल में हमारा त्याग-प्रधान दर्शन था।
राजा जनक महल में रहते थे जिसमें सारी सांसारिक सुविधाएं थीं किंतु संन्यासी की तरह रहते थे।त्याग-प्रधान अपने दर्शन के कारण एक राजा समृद्ध भी था और शांत भी। उनकी चिंतना थी-
"अपना क्या है इस जीवन में सब कुछ लिया उधार
सारा लोहा उन लोगों का, अपनी केवल धार।।"
आजादी के संघर्ष के दौरान तिरंगे में तीन रंगों के चुनाव- द्वारा "विविधता में एकता" को प्रतिबिंबित करने का प्रयास किया गया। "केसरिया" त्याग का प्रतीक हैं, "सफेद" शांति का प्रतीक हैं और "हरा" समृद्धि का।
प्रकृति में परमात्मा को देखने वाली हमारी दृष्टि को उगते हुए सूरज का केसरिया रंग भा गया, बहती हुई गंगा की श्वेत (सफेद)धारा ने मन मोह लिया और पेड़ों-पर्वतों पर बिखरी हुई हरियाली का हरा रंग हृदय को छू लिया।
आज पर्यावरण प्रदूषण के कारण धुएं से आकाश अच्छादित हो गया है। कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाकर हम चमकते सूरज में "केसरिया" रंग का नित्य दर्शन कर सकते हैं।
गंगा सफाई परियोजना को सफल बनाने का आह्वान करते हुए पर्यावरणविद् प्रोफेसर जीडीअग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने 112 दिनों के आमरण अनशन के बाद अपने प्राण त्याग दिए। तिरंगे के "सफेद" रंग को देखकर हमें गंगा की धवलधारा के साथ सभी नदियों और जलाशयों की स्वच्छता को वापस लौटाने का ख्याल आना चाहिए।
पेड़ों-पर्वतों पर जो "हरा" रंग दिखाई देता है,उन्हें बचा कर ही हम समृद्ध हो सकते हैं। कनकाचल और आदिबद्री पर्वत को खनन से बचाने के लिए एक साधु बाबा विजय दास आत्मदाह कर लेते हैं; और जंगलों तथा पहाड़ों को बचाने की पुकार हम भारतीयों से लगा जाते हैं।
आकाश की स्वच्छता, नदियों की धवलता और पर्वतों तथा जंगलों की हरियाली को वापस लौटाने की प्रेरणा हमारे तिरंगे से ज्यादा और कौन दे सकता है?
"तिरंगा बाहरी वस्तु नहीं, भीतरी गुण है
त्याग,शांति और प्रकृति-प्रेम की धुन है।।"
आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर परमात्मा से यही प्रार्थना है कि "हर घर तिरंगा हो" ताकि त्याग-शांति-समृद्धि का प्रतीक केसरिया,सफेद और हरा रंग हमारे जीवन में और गाढ़ा हो।
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ. सर्वजीत दुबे🙏🌹