संवाद


"गणेश जी की सूक्ष्म-दृष्टि"


हिंदू संस्कृति की दृष्टि अद्भुत और अनूठी है। विश्व की अन्य संस्कृतियों में देवपुत्र या देवदूत (Messenger of God)की कल्पना है। ईसाई मानते हैं कि ईशा गॉड के पुत्र थे और मुसलमान मानते हैं कि मुहम्मद अल्लाह के पैगंबर।


किंतु हिंदू सीधे परमात्मा को पृथ्वी पर उतार लाते हैं। और वह भी एक रूप में नहीं ,अनेक रूपों में।


उसमें भी हिंदुओं की कल्पना की ऊंचाई तो देखिए कि वे देवों में आदि-देव गणेश को मानते हैं जिनका मुख हाथी का और बाकी शरीर मानव का है। और हर कार्य की शुरुआत वक्रतुंड, महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ, लंबोदर और मूषक की सवारी करने वाले इस अद्भुत देव से होती है। वे अक्षर और मंगल के देवता हैं। अतः विद्यारंभ और हर शुभ कार्य की शुरुआत 'ऊं गणेशाय नमः' के साथ की जाती है।


बुद्धिविशारद गणेश को आदि-देव मानने की कथा गूढ़और प्रतीकात्मक है क्योंकि शंकर ने शर्त रखी थी कि जो देवता पूरी पृथ्वी की परिक्रमा लगाकर सबसे पहले आ जाएगा,वही आदि-देव माना जाएगा। इसमें चूहे जैसे छोटे वाहन से पृथ्वी की लंबी दूरी की परिक्रमा करना असंभव था। किंतु सूक्ष्म-दृष्टि-गणेश माता-पिता(पार्वती-शिव) की तीन परिक्रमा लगाकर प्रथम आ गए।


इस कथा के निहितार्थ बहुत गहरे हैं। पृथ्वी की परिक्रमा अर्थात् संसार की परिक्रमा। किसी का भी संसार में जन्म माता-पिता के द्वारा ही होता है। जन्म देने वाली की परिक्रमा लग गई तो संसार की परिक्रमा पूरी हो गई। यहां परिक्रमा सेवा-सुश्रूषा के अर्थों में ली गई हैं।


आज नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच बहिर्गामी वृत्ति के कारण संबंधों में एक दूरी आ गई है, जिसे जेनरेशन- गैप का नाम दिया गया है। इसके कारण एक ओर वृद्धाश्रम बढ़ते जा रहे हैं तो दूसरी ओर क्रेच -


"बहलाकर छोड़ आते हैं वृद्धाश्रम में मां-बाप को


अपने घरों में अब पुराना सामान कौन रखता है?


हर एक को दिखता है दूसरे में एक बेईमान इंसान


अपने भीतर में अब ईमान कौन रखता है??"


एक से एक तेज वाहन वाले देवताओं की एक परिक्रमा भी पूरी नहीं हो पाई और गणेश जी ने मूषक जैसे छोटे वाहन से तीन परिक्रमा पूरी कर ली। अर्थात् पाताल, पृथ्वी और अंतरिक्ष इन तीनों लोकों को नाप कर पूरे ब्रह्मांड को जान लिया। यह तीनो लोक मनुष्य के अंदर है- "यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे"


गणेश की परिक्रमा-दृष्टि हमें यही संदेश देती हैं कि अपने घर-परिवार में रहकर तन,मन और आत्मा के लोकों की सुधि ली जाए। यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों से मुक्ति का आदि देव गणेश का मंत्र है।


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे


गणेश-चतुर्थी की शुभकामना🙏🌹