🙏श्रद्धांजलि🙏


"हंसाने वाले की मौत पर भी हंसी सर्च होती रही"


हेट-स्पीच के जमाने में हंसी की स्पीच वाले की बात अंधेरी रात में कुछ चमकते सितारों सी बात हैं। जिन्हें लोग जीवन में बहुत ज्यादा सीरियस नहीं लेते, उनका जीवन ही नहीं मौत भी कुछ सीरियस इशारे कर जाता है। आखिर एक हास्य कलाकार की मौत पर अपनी शोक संवेदनाएं जताने के लिए उसकी हंसी की बोल और भाव भंगिमाओं के अतिरिक्त क्या बचता है? यही कारण था कि उनकी मौत पर भी हंसी ही सर्च होती रही।


हंसाने वाले राजू की मौत के साथ भी 42 दिनों तक लंबा संघर्ष चला। शादी से लेकर श्मशान गृह तक में कॉमेडी खोजने वाले के अंतिम संघर्ष को देखकर ऐसा लगता है मौत भी बार-बार उनकी बातों में मस्त होकर अपने मूल उद्देश्य को भूल जा रही थी।


राजनीतिक,सामाजिक,धार्मिक पहलुओं पर जितनी गहरी दृष्टि इस कलाकार की थी , उतनी ही कलात्मक अभिव्यक्ति भी। अधिकतर हास्य कलाकार जब ओछेपन और फूहड़पन के आरोपों से अपने आप को बचा नहीं पाते हैं, उस कला मंच पर राजू श्रीवास्तव जी अपने शब्द-बाहुल्य और व्यंग्य की गहरी समझ के कारण शालीनतापूर्ण मजाकिए लहजे में अपनी बात कह जाने का हुनर रखते थे। बड़े-बड़े राजनेताओं के समक्ष उन्हीं की मिमिक्री करके हास के साथ उपहास का अद्भुत नजारा पेश कर देना सबके वश की बात नहीं होती।


भास्कर में आने वाले उनके व्यंग लेखों को मैं लगातार पढ़ता था तो साहित्यिक-प्रतिभा की एक झलक दिखती थी और मंच पर जब उनकी आंगिक-वाचिक अभिव्यक्ति को देखता था तो उनकी अभिनय की प्रतिभा मनोरंजन से ज्यादा कुछ विशेष इशारे कर जाती थी। यही कारण था कि पाकिस्तान जैसे जगहों से उन्हें धमकियां भी मिला करती थीं। फिर भी कड़वे सत्य को हंसी की मिश्री में घोलकर वे प्रकट करने का साहस दिखाते रहे।


जिस जमाने में अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रश्नचिन्ह उठते हों, उस जमाने में भी अपने आप को निराले अंदाज में अभिव्यक्त कर देना; कोई हंसी-खेल की बात नहीं है। संस्कृत के नाटकों में विदूषक जैसा एक अद्भुत पात्र होता है जो कहने को तो राजा का मनोरंजन करता था किंतु हंसी-हंसी की बातों में कुछ ऐसी गहरी बात कह जाया करता कि उसकी दार्शनिकता का बाद में पता चलता।


हास्य कलाकारों की जिंदगी को सिर्फ हंसी मजाक में लेने वाले समाज को अपनी समझ बढ़ानी होगी तब वह इनकी जिंदगी से ही नहीं बल्कि मौत से भी बहुत कुछ नए गंभीर संदेश हल्के-फुल्के अंदाज में ग्रहण कर सकता है।


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे


विनम्र श्रद्धांजलि🙏🌹