प्रतिभा
October 20, 2022प्रिय उर्वी!
आपका स्पीच मैंने दो बार सुना। आवाज इको ज्यादा हो रही थी अत: शब्द बहुत ज्यादा स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं पड़ रहा था। लेकिन बॉडी लैंग्वेज, शब्दों के उच्चारण का ढंग और प्रस्तुतीकरण ने मेरा मन मोह लिया।
यदि आंखें गहरी हो तो बीज में ही देख लिया जा सकता है कि वृक्ष कितना बड़ा और कितनों को छाया देने वाला होगा। पूर्व जन्मों के संस्कार का नाम "प्रतिभा" है। अचानक कोई इतनी अच्छी इंग्लिश नहीं बोल सकता। उस पर से अपनी प्रतिभा को "परिश्रम" के द्वारा तुमने खूब तराशा है। मंच पर खड़े होने के ढंग और भावाभिव्यक्ति के समय बोलने के अंदाज में आत्मविश्वास बार-बार छलक रहा था। इस आत्मविश्वास के निर्माण में माता-पिता और परिवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक उदाहरण से तुम्हें समझाऊं तो आसानी होगी। यूपीएससी टॉपर ईरा सिंघल जो शरीर से विकलांग थी, का साक्षात्कार सुन रहा था। साक्षात्कार लेने वाले ने पूछा कि आपको कितनी बड़ी चुनौती महसूस हुई? अष्टावक्र को याद दिलाने वाली काया से युक्त उस प्रतिभा का जवाब मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। ईरा ने कहा कि यदि मां- बाप का प्यार और समर्थन मिले तो फिर जीवन में कोई चुनौती बहुत मुश्किल नहीं रहती।
मां-बाप और परिवार ने जो प्यार और ध्यान दिया, उसे तुमने बहुत अच्छी प्रकार से महसूस किया और सदुपयोग किया। तन के सौंदर्य को मन का सौंदर्य कई गुना बढ़ा देता है। उस पर से आत्मा के सौंदर्य की छाया पड़ने लगे तो सोने पे सुहागा हो जाता है।
इंग्लिश पढ़ने का और सीखने का मुझे बहुत शौक रहा है किंतु जनजातीय क्षेत्र में आकर सब छूट गया। नई पीढ़ी के कारण मुझे फिर से इस पर मेहनत करनी पड़ेगी। मैं इसके लिए बहुत उत्साहित हूं कि घर में ही मुझे आइडियल स्पीकर मिल जाएगा।
अब तुम दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में अपनी प्रतिभा का परचम फहराओगी। परमात्मा से प्रार्थना करता हूं कि तुम्हें सदैव स्वस्थ रखे और नई-नई ऊंचाइयों को छूने का सौभाग्य प्रदान करे।
नई पीढ़ी के स्वाध्याय-यज्ञ में यदि थोड़ी भी मैं सहायता कर पाया तो अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली समझूंगा। प्रतिभा के साथ प्रयास जुड़ने के बाद सबसे बड़ी चीज "प्रसाद" होती है।
भगवान से प्रार्थना है कि नई पीढ़ी को प्रसाद भी मिले ताकि फूल खिले ही नहीं बल्कि उसकी सुगंध दूर-दूर तक फैले-
"लाखों हैं फूल खिलते, लाखों हैं रोज झरते
यह चक्र है नियति का,पर मधुमास मर न जाए।
फितरत है आदमी की छूना बुलंदियों को
इतना ख्याल रखना यह एहसास मर न जाए।।"
शुभाशीष और शुभकामना।
सर्वजीत
20/10/22