स्वार्थ
October 20, 2022प्रिय मनु!
भारतीय संस्कृति में एक प्यारा शब्द है "स्वार्थ". इसका अंग्रेजी में रूपांतरण किया गया सेल्फिश। "Selfish"शब्द नकारात्मक है जिसका मतलब होता है जो दूसरों को हानि पहुंचा कर भी अपने लाभ के लिए ही सोचता है। संस्कृत का शब्द "स्वार्थ" का मतलब होता है-पहले बीज अपने को अंकुरित करने,खिलाने और विकसित करने पर जोर दे। जब बीज बन जाएगा "वृक्ष" तब फल से लदने के बाद उसको अपने को दूसरों के लिए लुटाना ही है। फल पकने के बाद या तो अपने आप गिर जाता है या जबरदस्ती रोक रखने पर सड़ जाता है।
संस्कृत के एक श्लोक में विद्यार्थी को "असामाजिक" रहने को कहा गया है क्योंकि समाज में जाने से पहले उसे कुछ न कुछ अर्जित कर लेना चाहिए जिसे वह समाज को दे सके।
मैं भी अपने दोस्तों के साथ दिन-रात रहता था किंतु हमेशा ध्यान मेरा अपने जीवन को उस मुकाम पर पहुंचाने का रहता था जहां से मैं अपने परिवार और समाज के लिए कुछ कर सकूं। अतः सत्संगति में बहुत अच्छी पढ़ाई होती थी और मंजिल की ओर तीव्र गति से कदम बढ़ जाते थे। मैं स्वयं किसी का भी समय नहीं खराब करता था, अतः हर कोई मुझे पसंद करता था। मैं स्वयं भी अपने समय और शक्ति की बहुत कद्र करता था क्योंकि इन्हीं के सहारे मुझे अपनी मंजिल तक पहुंचना था।
मैं तुम्हें पढ़ाई में ध्यानमग्न देखता हूं तो स्वयं भी अपना छोटा सा काम नहीं बताता हूं ताकि तुम्हारा ध्यान नहीं टूटे। अतः दोस्तों की संगति में खूब अपने पढ़ने की रणनीति पर विचार करना तथा आनंद में समय बिताना।
दोस्तों के साथ सामान्य बातचीत में मुझे जीवन की सारी जानकारियां हो जाती थी। उदाहरण के तौर पर वे कहां पहुंचना चाहते हैं और उसके लिए कौन सी रणनीति पर काम कर रहे हैं,उसमें कौन सी चुनौतियां हैं और वे उसका कैसे सामना कर रहे हैं? मूर्ख वे होते हैं जो अपनी गलतियों से भी नहीं सीखते जबकि बुद्धिमान वे होते हैं जो दूसरों की गलतियों से भी सबक ले लेते हैं।
तुम मेरे इस पत्र को इस रूप में मत लेना कि तुम घूमने गए हो तो मुझे कोई ऐतराज है। मेरे पत्र का मूल आशय है कि जिंदगी सिर्फ किताबों में नहीं बल्कि कई प्रकार के जीवन के अनुभवों को जानने और उससे सीख कर आगे बढ़ने में है।
तुम्हारी यात्रा मंगलमय हो।
शुभकामना
20/10/22