13 नवम्बर 2022
November 13, 202213 नवम्बर 2022
प्रत्येक मनुष्य के शरीर से गंध निकलती रहती है, जिसे हम पसीना कहते है। हमारे मन में जो संकल्प चलते हैं, उन संकल्पों का यह सूक्ष्म और तरल रूप है। अगर हमारे संकल्प शुद्ध होते हैं तो यह सुगंध के रूप में बाहर निकलते हैं। अगर बुरे विचार अधिक होते हैं तो यह दुर्गंध फैलाते है। यह सुगंध/दुर्गंध व्यक्ति के कपड़ों और आसपास के वातावारण पर भी असर डालते हैं। यही सम्मोहन या विकर्षण का कारण बनते हैं। प्राचीन आश्रमों में ऋषियों की तपस्या के कारण, उनके संकल्प बहुत शुद्ध/सात्विक होते थे, उनसे सात्विक सुगंध निकलती/झरती थी, जो सम्मोहन का कार्य करती थी। जिससे हिंसक प्रणियों का वैरभाव भी मिट जाता था, शेर और बकरी एक घाट पर पानी पीते थे। नेवला और सर्प एक वृक्ष की छाया के नीचे बैठते थे। भगवान श्रीकृष्ण को तो सम्मोहन का आविष्कारक माना जाता है। जो दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करें, वही श्रीकृष्ण/देवी/देवता है। श्रीकृष्ण ने समस्त गोकुल/मथुरा/वृंदावन को सम्मोहित कर रखा था।स्वामी विवेकानंद हजारों/लाखों लोगों को प्रभावित कर देते थे। यह भीतरी शुद्धता/संकल्प/तप का सम्मोहन ही था। उनसे मिलने के लिये अंग्रेज लाइन बना कर खड़े होते थे। स्वामीजी जैसे ही उनके पास से गुजरते थे उन अंग्रेजों के विचार बदल जाते थे। यह शक्ति हम सब में भी है। हम सभी भी किसी ना किसी से प्रभावित होते/करते हैं, जबकि वह थोड़ा कम/ज्यादा हो सकता है। यह सब उदाहरण सिद्व करते है कि सम्मोहन और कुछ नहीं सिर्फ हमारे मीठे संकल्प हैं जिनमें यह संदेश है कि आप हमें पसंद हो, आपके साथ हमारे प्रेम/मैत्री/शांति/सुकून के भाव हैं। ऐसे मैत्रेय के साथ कभी कोई डर/भेदभाव/ऊंचनीच नहीं, सिर्फ कल्याण ही कल्याण का संबंध होता है। यह सच है कि सभी गहन तप नहीं कर सकते लेकिन यदि हमारे भीतर सबके कल्याण/मंगलकामना/मैत्री के भाव की तरंगें निरंतर बहती रहें तो स्वत: ही हममें सम्मोहिनी शक्ति विकसित/विस्तृत होने लगती है। जो बिना कुछ किये भी, बस उपस्थिति मात्र से, सबके लिए निरोग/शांति/प्रसन्नता/आनंद का वातावरण तैयार कर देतीं हैं। सुप्रभात -आज का दिन शुभ व मंगलमय हो।