दर्शन जो युद्ध नहीं,बुद्ध देता है
November 14, 2022संवाद
"दर्शन जो युद्ध नहीं,बुद्ध देता है"
विश्व दर्शन दिवस का थीम 2022 के लिए "द ह्यूमन ऑफ द फ्यूचर" अर्थात् 'भविष्य का मानव' है।
विश्व दर्शन दिवस वर्ष 2002 से यूनेस्को द्वारा 15 नवंबर को या नवंबर महीने के तीसरे गुरुवार को मनाना प्रारंभ किया गया। मूल उद्देश्य है- दर्शन की जो विरासत रही है,उसे साझा कर सत्यं शिवं सुंदरम् की ओर जगत को ले जाना।
भविष्य का मानव निराग्रही हो। यदि उसकी आंखें पूर्वाग्रह,दुराग्रह और हठाग्रह से युक्त हो तो सम्यक-दर्शन का अभाव हो जाएगा।फिर लिया गया निर्णय विनाशकारी साबित होगा। अतः भारतीय संस्कृति में राजा अपना कुलगुरू रखता था जिससे पूछ कर कोई निर्णय लिया करता था। राजा के पास शक्ति होती थी और गुरु के पास शांति होती थी। शांति की छांव में लिया गया कोई भी निर्णय शक्ति को सम्यक् दिशा दे देता था।
विश्व की अधिकांश समस्याओं के मूल में शांति और शक्ति के सामंजस्य का टूट जाना है। आज राष्ट्रपति पुतिन या जेलेंस्की रुकने को या झुकने को तैयार नहीं है और आशंका है कि सम्यक दर्शन के अभाव में अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर वे दोनों विश्व को मुसीबत में डाल सकते हैं।
इसके पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने पर्याप्त कारण के बिना हिरोशिमा,नागासाकी पर एटम बम गिराने का निर्णय लिया था और विश्व ने महाविनाश को देखा।
इस वक्त विश्व को एक ऐसे व्यापक और विराट दर्शन की आवश्यकता है जिसमें "सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय" की भावना हो। प्लेटो ने इसीलिए दार्शनिक राजा की अवधारणा दी।
किंतु आज राजा और राज्य के लिए दर्शन सबसे उपेक्षित विषय है।भारतीय संस्कृति का यह सबसे महत्वपूर्ण और प्रथम विषय दर्शन स्कूलों में तो पढ़ाया ही नहीं जाता है और कॉलेजों में इसके प्राध्यापकों की संख्या बहुत कम है।
जब हम विश्व की विभिन्न दृष्टियों पर चिंतन-मनन नहीं करेंगे तो सम्यक-दर्शन का कैसे प्रादुर्भाव हो पाएगा? विषय कोई भी हो उसकी सर्वोच्च उपाधि पीएचडी दी जाती है जिसका अर्थ है डॉक्टरेट इन फिलॉसफी ।
विश्व दर्शन दिवस एक अवसर देता है कि मानव अपने जीवन-दृष्टि पर चिंतन-मनन करे।प्रकृति को नष्ट करके विकास का जो रास्ता हमने चुना है उसके मूल में भी एक असम्यक्-दर्शन है।अब जरूरत है एक ऐसे "सम्यक्-दर्शन" की जो प्रकृति का संरक्षण भी करे तथा संस्कृति का संवर्धन भी करे ताकि मा कश्चित् दुख भाग भवेत् का उद्देश्य साकार हो सके।
सम्यक्-दर्शन के कारण राम की सत्ता सेवा का माध्यम बन गई । असम्यक्-दर्शन के कारण आज सत्ता शोषण का माध्यम बन गई है। दर्शन गलत होने के कारण आज विपक्ष वैरी बन गया है और पड़ोसी दुश्मन।
मानव का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि 'दी ह्यूमन ऑफ द फ्यूचर' क्या चुनता है- बुद्ध का दर्शन या युद्ध का दर्शन??
'दर्शनशास्त्र विभाग' से डॉ.अंजना रानी
'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ.सर्वजीत दुबे🙏🌹