Messi miss U


"सरहद पार के आंसू"


मेसी के लिए दुआ और अर्जेंटीना के लिए आंसू अपने बेटे की आंखों में देखकर एक साथ कई अनुभव फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में हुए।


अपनी हर परीक्षा को बहुत शांत और तनावरहित मूड में देने वाला बच्चा अपने पसंदीदा खिलाड़ी मेसी के लिए इतना तनाव में आ गया कि मैच को बीच में ही देखना छोड़ देना पड़ा।


दिल की धड़कनें बढ़ गईं और रक्तचाप इतना असामान्य हो गया कि हाफ टाइम के बाद मैच देखना बंद करके उसे टहलने के लिए बाहर निकलना पड़ा और उसकी हालत देखकर मैं भी छत पर अकेले टहलने लगा।


किंतु दो गोल से आगे चल रहा अर्जेंटीना अपनी बढ़त बनाए रहे, ऐसी दुआ मन से करने लगा क्योंकि चिंता हो रही थी कि बच्चे जो बचपन से ही मेसी के टीशर्ट पहनते हैं, कहीं सदमे में न आ जाएं। अतः निगाह मोबाइल पर स्कोर जानने में लगी रही।


बच्चे की चिंता में मैं यह भूल गया कि फ्रांस के लिए भी तो दुआ मांगने वाले लोग होंगे। एमबापे ने आखिरी क्षणों में दो गोल करके तनाव चरम पर पहुंचा दिया और मैच को एक्स्ट्रा टाइम में।


एक्स्ट्रा टाइम में फिर मेसी ने गोल करके अर्जेंटीना की आशा को जगा दिया और एमबापे ने फिर गोल करके उस आशा पर तुषारापात कर दिया।


चिंता के मारे मैं बच्चे के पास पहुंचा जो तनाव कम करने के लिए अपने दोस्त से मोबाइल पर बात कर रहा था। उसके सारे दोस्तों का भी यही हाल था। सभी मेसी के लिए गोल्डन बॉल हेतु प्रार्थना कर रहे थे।


और जब पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना जीता तो बच्चे से जीत की खुशी को व्यक्त करने के लिए कंठ से शब्द नहीं निकल रहे थे और उसके दोस्त भी मोबाइल पर आंसुओं की भाषा में ज्यादा बात कर रहे थे।


अपने खेल जीवन के उतार-चढ़ाव का गहरा अनुभव मुझे रहा किंतु ऐसा गहरा अनुभव पहली बार हुआ। यदि किसी खिलाड़ी के प्रति किसी की भी दीवानगी हद से ज्यादा बढ़ जाए तो अपने पसंदीदा खिलाड़ी के जीत की खबर सुनने के फेरे में वह मैच देखने के लायक नहीं बचता। बड़ा बेटा बांसवाड़ा में अपने दोस्तों के साथ मेसी के जीत की खुशी में आंसू बहा रहा था और छोटा बेटा चेन्नई में अपने दोस्तों के साथ खुशी के आंसू रोक नहीं पा रहा था।


हारने वाले की आंख में आंसू ; जीतने वाले की आंख में आंसू ; हार के साथ विदा होने वाले रोनाल्डो की आंख में आंसू और जीत के साथ गोल्डन बॉल लिए हुए मेसी की आंख में आंसू ; ; आखिर आंसुओं का यह संसार अद्भुत है। इसे देखकर सुनील दत्त द्वारा अभिनीत "मिलन" फिल्म में मुकेश द्वारा गाया गया, "आनंद बख्शी" के लिखे इस गीत ने मेरे आंखों में आंसू ला दिए-


हजारों तरह के ये होते हैं आंसू


अगर दिल में गम हो तो रोते हैं आंसू


खुशी में भी आंखें भिंगोते हैं आंसू


इन्हें जान सकता नहीं ये जमाना


मुबारक हो सबको समां ये सुहाना


मैं तो दीवाना, दीवाना,दीवाना...


काश! ये आंसू नफरत करने वाले और हिंसा करने वाले की आंखों में भी उतर आए तो धर्म,जाति,राष्ट्र के नाम पर खून बहाने वालों की आंखों की खूबसूरती बढ़ जाए-


"आंसू भले जमीन पर गिरते हैं,


पर गिरानेवाले आसमां पे तिरते हैं।"


'शिष्य-गुरु संवाद' से डॉ सर्वजीत दुबे🙏🌹