सत्ता नहीं,सत्य अटल है
December 25, 2025🙏सनातन मूल्य के अटल प्रतिनिधि को नमन 🙏
संवाद
'सत्ता नहीं,सत्य अटल है'
राजनीति में जो जीतता है, वह अपने आप को सत्य बताने लगता है। मुंडकोपनिषद् से लिया गया भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' धर्म में गहरे गए हुए ऋषि का वचन है, किसी राजनीतिज्ञ का नहीं। राजनीति ने अपने दरवाजे पर 'सत्य की ही जीत होती है'-इसे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखवाकर एक बहुत बड़ा भ्रम दुनिया के सामने उपस्थित कर दिया।
एक वोट से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई, क्या वे असत्य के रास्ते पर थे? नहीं, वे सत्य के रास्ते पर थे।अन्यथा एक सदस्य होने पर भी जोड़-तोड़कर, खरीद-फरोख्त से आजकल सरकार बना लिया जाता है लेकिन वाजपेयी जी को एक वोट मैनेज करना भी मंजूर नहीं था। इसलिए राजनीति में वाजपेयी जी हार गए। परंतु धर्म की दुनिया में यह अटल मूल्य सदा-सदा के लिए जीत गया।
संसद में उन्होंने कहा कि-'पार्टी तोड़कर सत्ता के लिए नया गठबंधन करके अगर हाथ में सत्ता आती हो तो उस सत्ता को मैं चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करूंगा।' जब एक वोट को मैनेज करने के लिए उन्होंने अनैतिक रास्ता नहीं अपनाया तो अपने वचन को अपने आचरण में परिवर्तित करके उन्होंने 'सत्यमेव जयते' को प्रतिष्ठित कर दिया।
मुझे याद है उस समय का दृश्य जब संसद में हारे हुए वाजपेयी सबके दिलों में जीत गए थे। समय उन सरकारों को भूल जाएगी जो अनैतिक गठबंधन से सत्ता में आ जाती हैं किंतु बदलते और बढ़ते समय के साथ अटल जी का यह सत्ता को हारकर भी सत्य का अनुगमन करने वाली और हृदय को जीतनेवाली अदा सदियां भी नहीं भुला पाएंगी।
'प्यार और जंग में हर चीज जायज है'(everything is fair in love and war) का मंत्र देने वाला पश्चिम परमाणु युद्ध पर पहुंच गया। 'सत्यमेव जयते' का मंत्र देने वाला पूरब युद्ध पर नहीं बुद्ध पर पहुंचा। बुद्ध के प्रभाव ने कलिंग युद्ध में जीते हुए राजा अशोक का हृदय परिवर्तित कर दिया और धम्म में प्रवेश करा दिया।
कलिंग युद्ध के बाद पश्चिम का सम्राट होता तो अपनी विजय की विश्वव्यापी उद्घोषणा करता हुआ सर्वत्र प्रदर्शन करता। किंतु पूरब का सम्राट धर्म में पारंगत किसी गुरु के चरणों में सर झुकाया करता था, दूसरे शब्दों में कहें तो शक्ति सत्य के आगे नतमस्तक हुआ करती थी। इसी कारण से कलिंग युद्ध की जीत में भी अशोक को हार दिख गई।
'क्या कभी तुम जान पाए जीत क्या है , हार क्या है?
इस जरा सी जिंदगी में जिंदगी का सार क्या है??'
भारतीय संस्कृति का पहला विषय दर्शन है जिसका सार वाक्य है-'सत्यमेव जयते'.भारत का राष्ट्रीय वाक्य इसे इसलिए चुना गया क्योंकि इस दो दिन की जिंदगी में सार की बात सत्ता नहीं , सत्य है।असत्य कितना भी जीतता हुआ दिखाई दे, किंतु वह अंततः हारता है। सत्य कितना भी हारता हुआ दिखाई दे किंतु अंत में वही जीतता है।'सत्यमेव जयते' की राह पर सत्ता को कुर्बान करने वाले अटल जी का स्थान अद्वितीय है। उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं... 🙏🙏🙏
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹