🙏वर्ष २०२५ के अनेक चित्र आंखों में तैर रहे हैं किंतु एक चित्र आंखों से नहीं हट रहा क्योंकि सारे रसों में से एक करुण रस अद्भुत है-'एको रस:करुण एव'🙏


संवाद


'फोटो ऑफ़ द ईयर 2025'


दिन अनेक घटनाओं से भरा होता है और मोबाइल से अनेक चित्र लिए जाते हैं। वर्ष के अनेक घटनाओं और दुर्घटनाओं से भरे चित्रों के मध्य से एक को चुनना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन पहलगाम की घटना में धर्म पूछकर मारे गए पति के पास हताश बैठी हुई पत्नी का चित्र अन्य सारे चित्रों पर भारी पड़ गया। मेरे हृदय से करुणा के भाव इन शब्दों में छलक पड़े-


'मंगल पर पहुंच चुके हैं विज्ञान के पांव


देखना यह है कि इंसान कहां तक पहुंचे


अमंगल की दास्तां है जहां तक पहुंचे


मेरी आरजू है कि मंगल भी वहां तक पहुंचे।'


प्रेम से पगे हुए पंछी के जोड़े में से जब एक को बहेलिए ने मारा तब ऋषि वाल्मीकि का शोक आदिकाव्य रामायण के रूप में बाहर आया जिसके आरंभिक श्लोक का अर्थ है-हे निषाद! तुम अनंत काल तक प्रतिष्ठा (शांति) प्राप्त न कर सको, क्योंकि तुमने प्रेम-मग्न क्रौंच-मिथुन (जोड़े) में से एक का वध कर दिया-


'मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।


यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्॥' 


उस समय के बहेलिये ने तो अपनी क्षुधातृप्ति के लिए मारा था जिसमें कुछ मजबूरी भी दिखाई देती है ; लेकिन आज के बहेलिये तो तथाकथित धर्म के लिए मार रहे हैं और वह भी अकेले नहीं समूह के रूप में मिलकर। कहीं अखलाक मारा जाता है तो कहीं दीपूदास तो कहीं जुएल राना। आखिर आदमी की आदमीयत  को क्या हो गया-


'रौनकें तो गईं कारवां के साथ


अब तो रास्ते का गुब्बार बाकी है


आदमियत तो मर गई कब की


अब तो सिर्फ उसका मजार बाकी है।'


जितना ज्यादा मंदिर मस्जिद बनते जा रहे हैं,उतना ज्यादा ऐसी नृशंस और हृदय विदारक घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?


इन घटनाओं से भी खतरनाक इन घटनाओं के विरोध में एक पूरे समुदाय के हृदय में धधक रही ज्वालामुखी है। उस ज्वालामुखी को और भड़काने का काम मीडिया पर हो रही चर्चाओं द्वारा किया जा रहा है। पंछी को मारने वाले बहेलिये के प्रति भी कभी-कभी मेरा हृदय थोड़ा नरम हो जाता है क्योंकि उसके कारण आदिकाव्य रामायण जगत को प्राप्त हुआ जिसके नायक राम ने प्रेम,करुणा और कर्त्तव्य भावना का संदेश हम सबको दिया। किंतु धर्म पूछकर आदमी को मारने वाले बहेलियों के प्रति तो सिर्फ एक अफसोस की भावना उठती है जो पूछती है कि इस हृदयविहीन मानव का निर्माण आखिर किस पाठशाला में हो रहा है?


'दाढ़ियां और चोटियां टकराती हैं चौराहों में


अमन और चैन का साया नहीं है इन राहों में


तेरे शहरों में मोहब्बत का पता कौन तुझे


आदमी तो मिलता नहीं है खुदा कौन पूछे?'


प्रेम के दो पल चुराने के लिए पहलगाम पहुंचे प्रेमी जोड़ों में से एक को धर्म पूछकर मार देने की घटना वाली तस्वीर बार-बार तकदीर से पूछ रही है कि आखिर कौन सी तदवीर है जिससे ऐसी घटना दोबारा न हो।


'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹