🙏प्रदूषित पानी से अनेकों इंसान की जान जाए और क्रिकेट में हिंदू मुसलमान किया जाए तो इस सोच पर सोचना चाहिए 🙏


संवाद


'स्वच्छ शहर के साथ हो स्वच्छ सोच'


नववर्ष की शुरुआत में प्रदूषित पानी पीने से स्वच्छता में नंबर वन शहर इंदौर में अनेक लोगों का मर जाना और जनमानस का शांत रहना उतना ही उद्वेलित करता है जितना भीड़ द्वारा किसी इंसान को मारे जाने पर हिंदू मुसलमान के नाम पर पूरे हिंदुस्तान का आंदोलित हो जाना। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए नागरिक निर्माण की दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए या हिंदू मुसलमान निर्माण की दिशा में ; यह प्रश्न आज सबसे महत्वपूर्ण बन गया है।


रहीम कवि ने कहा था-


'रहिमन पानी राखिये,बिनु पानी सब सून


पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।'


सरकार और समाज की सोच ऐसी बन गई है कि इस समय में जो घटना सार्वभौमिक महत्व की है वह तो गौण बना दी जाती है और जो घटना स्थानीय महत्व की है उसको जन गण मन का प्रश्न बना दिया जाता है।


                उपनिषदों से लेकर विज्ञान तक ने यह स्वीकार किया है कि जहां जल है, वहीं जीवन है। भारत ने तो जल के देवता वरुण को नियामक देव माना है और नदियों को माता कहा है। जब वही जल मृत्यु का कारण बन जाए तो प्रश्न उठता है कि हम विकास की किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? नदियों के देश भारत में हमारे जलस्रोत गंदे होते जा रहे हैं और हर कार्यक्रम में प्लास्टिक की बोतल में बंद पानी की संस्कृति बढ़ती जा रही है। 'पानी बीच मीन पियासी, मोहि देखी देखी आवत हांसी' कहावत को कबीर ने बरसों पहले कहा था किंतु अब उसका नजारा चारों तरफ देखने को मिल रहा है। यह सरकारी चेतना ही नहीं बल्कि पूरे सामाजिक चेतना की मृत्यु है जो बताती है कि प्रकृति के साथ हमारा संबंध विच्छेद हो गया है। अरावली बचाओ आंदोलन ने जनमानस को झकझोरा लेकिन समय की मांग है कि जल बचाओ आंदोलन ही नहीं बल्कि 'प्रकृति की ओर लौटो' का आंदोलन शुरू किया जाना चाहिए।


जिस देश में स्कूल की छतें गिरने से देश का भविष्य मर जाता हो और प्रदूषित पानी पीने से स्वच्छता का शहर शमशान बन जाता हो; वही देश हिंदू मुसलमान के मुद्दे पर दिन-रात सोच रहा हो और बांग्लादेश का खिलाड़ी आईपीएल में नहीं खेलना चाहिए इस पर त्वरित निर्णय ले रहा हो तो हमें लगता है कि स्वच्छ शहर से ज्यादा जरूरी है स्वच्छ सोच।


'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹