🙏बसंत पंचमी की शुभकामना "ऊं सरस्वत्यै नमः" नेताजी के जन्मदिवस पर उनके कम प्रचलित किंतु अधिक प्रभावी 'इत्तेहाद इत्तेमाद कुर्बानी' नारे की समसामयिक व्याख्या 🙏


संवाद


"इत्तेहाद इत्तेमाद कुर्बानी वाले नेताजी"


'नेताजी' शब्द आज समादृत नहीं रहा। देश को आगे ले जाने वाले जीवंत उदाहरण से 'नेताजी' शब्द में वास्तविक अर्थ आता है । संकल्प,साहस और समर्पण जैसे गुणों को सुभाष चन्द्र बोस में देखकर आजाद हिंद फौज के सैनिकों व जानकारों ने उन्हें "नेताजी" संबोधन से पुकारना शुरू किया था और उनके लिए यह उपनाम लोकप्रिय हो गया। आज के अधिकांश नेताजी धन,पद,प्रतिष्ठा के पीछे भागते हैं, अतः 'नेताजी' शब्द अपनी गौरव-गरिमा खो बैठा। नेताजी सुभाषचंद्र बोस को ऊंचाइयां मिली थी स्वामी विवेकानंद द्वारा व्याख्यायित वेदांत दर्शन के कारण और आज के नेताजी उपहास के पात्र बने हैं अविवेकपूर्ण प्रदर्शन के कारण।


           परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़े हुए आत्महीन हो चुके भारत के सर्वाधिक विभाजनकारी कालखंड में नेताजी के त्याग,पराक्रम और एकता के मंत्र ने लाखों करोड़ों आत्माओं को प्रेरणा दी। आज भी 'इत्तेहाद इत्तेमाद कुर्बानी' का उनका नारा हमारा पथप्रदर्शक बन सकता है।


                     1.इत्तेहाद(एकता):-धर्म,जाति,क्षेत्र,भाषा इत्यादि के नामों पर इंसानों के दिलों की जो दूरियां बढ़ा दी गई हैं, उनके लिए इत्तेहाद (एकता) की संभावना का द्वार वेदांत दर्शन है जो 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म', 'वसुधैव कुटुंबकम्'और 'संगच्छध्वं,संवदध्वं' का मंत्र देता है। वेदांत दर्शन पर स्वामी विवेकानंद के व्याख्यानों को पढ़कर सुभाष बोस की दृष्टि बहुत विराट हो गई। आज एक तरफ पड़ोसी देशों में हिंदूओं का संहार और दूसरी तरफ भारत में हिंदू राष्ट्र का बढ़ता ज्वार हमारी एकता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। सुभाष बाबू ने आजाद हिंद फौज में सभी को एकता के सूत्र में बांधकर ऐसी विरासत छोड़ी कि आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर चला  'लाल किले का मुकदमा' आजादी के लिए लड़ रहे नौजवानों के लिए एकता का पैगाम बन गया।"लाल किले से आई आवाज, सहगल ढिल्लन शाहनवाज" का नारा सारे देश में गूंजने लगा। इस्लाम में 'उम्मा' की अवधारणा और ईसाई धर्म में 'ब्रदरहुड' का सिद्धांत भी नेताजी बोस के धार्मिक समन्वय और एकता के पक्ष की गवाही देता है।


                   2.इत्तेमाद(विश्वास):-स्वयं पर विश्वास की कमी और दूसरों पर अविश्वास ने भारत को आत्महीन और कमजोर बना दिया था‌। बोस ने इत्तेमाद के आह्वान द्वारा जनता और सैनिकों के न सिर्फ आत्मविश्वास को लौटाया बल्कि परस्पर विश्वास का भाव भी जगाया। इस दिशा में विवेकानंद का यह कथन कि पहले अपने आप में विश्वास फिर ईश्वर में विश्वास उनका प्रेरणास्रोत बना। इस्लाम में 'ईमान' और ईसाई धर्म के 'फेथ' में भी इसी विश्वास की अभिव्यक्ति है।


                   3.कुर्बानी(बलिदान):-नेताजी के सिद्धांत का सबसे गहन पक्ष कुर्बानी है जिसकी सशक्त अभिव्यक्ति 'तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दूंगा' नारे में हुई। किंतु इसकी शुरुआत उन्होंने स्वयं के जीवन से की थी जब उन्होंने आईसीएस जैसे बड़े पद को मातृभूमि की सेवा के लिए कुर्बान कर दिया। अपने जीवन को अज्ञात खतरे में डालकर अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर जो उदाहरण उन्होंने पेश किया वह बेमिसाल है। इस्लाम में 'कुर्बानी',ईसाई धर्म में 'यीशु का बलिदान' और हिंदू धर्म में 'यज्ञ' परंपरागत रूप से सामूहिक हित के लिए स्वयं के बलिदान की प्रेरणा देते रहे हैं किंतु नेताजी ने इस प्रेरणा को अपने त्यागमय जीवन से दिया।


      'जय हिंद' जैसे सबके हृदय को छूने वाले नारे को देनेवाले नेताजी ने 'इत्तेहाद इत्तेमाद कुर्बानी' जैसे नारे से सबको आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।


'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹