वैभवपूर्ण भारत
February 8, 2026🙏क्रिकेटर वैभव की तरह भारत में अन्य अनेक क्षेत्रों में भी वैभव छिपे हुए हैं किंतु वे अंधेरे में गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बावजूद प्रशिक्षण और अवसर नहीं मिलता-एक शैक्षिक विश्लेषण 🙏
संवाद
'वैभवपूर्ण भारत'
वैभव का अर्थ होता है-'धन-संपत्ति'। वैभव सूर्यवंशी के अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 80 गेंदों में विस्फोटक 175 रन की पारी को देखने के बाद कई प्रकार की अतीत की स्मृतियां और कई प्रकार की भविष्य की कल्पनाएं मन में उभरने लगीं। क्योंकि बिहार का वैभव अब राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय वैभव बन चुका है।
जब बिहार से झारखंड अलग नहीं हुआ था तो रांची जिले के अधिकतर खिलाड़ी 'बिहार क्रिकेट टीम' में होते थे। बंटवारे के बाद पटना जिले के अधिकतर खिलाड़ी 'बिहार क्रिकेट टीम' में होने लगे क्योंकि रांची झारखंड का हिस्सा बन गया। किंतु बिहार के क्रिकेट के दृष्टिकोण से कम परिचित समस्तीपुर जिला से वैभव निकल कर इतनी छोटी उम्र में राजस्थान रॉयल्स का सदस्य बन जाएगा और राष्ट्रीय क्षितिज पर संभावनापूर्ण सितारे के रूप में उभर जाएगा ; किसी ने सोचा नहीं था। किंतु धरती की कोख में कई गुदड़ी के लाल छिपे हुए हैं-
'खिलते नहीं कुसुम मात्र राजाओं के उपवन में
अमित बार खिलते हैं पुर से दूर कुंज कानन में
कौन जाने रहस्य प्रकृति का बड़ा अनोखा हाल
गुदड़ी में रखती चुन चुन कर बड़े कीमती लाल।'
क्रिकेट की दीवानगी में दसवीं बोर्ड परीक्षा के समय भी हम और हमारे साथी अध्ययन-कक्ष में नहीं,क्रिकेट के मैदान में समय बिताते थे। उस समय पटना क्रिकेट लीग में 30 ओवर का मैच होता था। फिफ्टी स्कोर करने वाला स्टार बन जाता था क्योंकि ऑफेंसिव (offensive) और डिफेंसिव (defensive)दोनों कला बल्लेबाजी में देखी जाती थी। ऐसे में कोई शतक मार देता था तो तहलका मच जाता था। उस समय की सोच फिफ्टी से ज्यादा शतक तक किसी-किसी की पहुंचती थी। वैसे ही बिहार से बढ़कर देश के लिए खेलने की भी सोच उस समय नहीं पनपी थी।
अंडर-19 इंडिया टीम के लिए पटना से जब सबा करीम और अमिकर दयाल का चयन हुआ तो बिहार के खिलाड़ियों के सोचने का दायरा व्यापक हुआ। नहीं तो पहले इंडिया टीम भी मुंबई और दिल्ली को मिलाकर बना दी जाती थी। बाद में रांची से धोनी के प्रादुर्भाव ने भारतीय टीम के संतुलन को बदल कर रख दिया।
इसी प्रकार से टेस्ट मैच के बाद वन डे और उसके बाद आईपीएल के द्वारा आयोजित 20-20 ने खेल के दृष्टिकोण को पूर्णतया बदल कर रख दिया। टेस्ट मैच की लोकप्रियता के दिनों में 'Defensive is the best offensive' (रक्षात्मकता ही बेहतरीन आक्रामकता है)बल्लेबाजी का मूलमंत्र होता था। विवियन रिचर्ड्स जैसे बल्लेबाजों के कारण 'Offensive is the best defensive' (आक्रामकता ही बेहतरीन सुरक्षात्मकता है) बल्लेबाजी का मूलमंत्र बन गया। वैभव सूर्यवंशी को देखकर लगता है कि ऑफेंसिव (आक्रामकता) भी विस्फोटक होना चाहिए। चौके और छक्के से शतक पूरा कर लो,दौड़ने की जरूरत ही न पड़े।
वैभव सूर्यवंशी के बहाने मैं क्रिकेट की कलात्मकता से ज्यादा जीवन की कलात्मकता पर बात करना चाहता हूं ताकि एक सितारे के साथ कई छिपे हुए गुदड़ी के लाल को आशा की किरण दिख सके। कोई अगर अपनी प्रतिभा को पहचान ले और उसको निखारने के लिए कठिन परिश्रम करे तो उसकी जीवन कली खिलकर फूल बन जाती है। लेकिन प्रतिभा और परिश्रम के साथ बेहतरीन प्रशिक्षण मिल जाए तथा उचित अवसर मिल जाए तो वह फूल अपनी सुवास से चमन को सुवासित कर देता है-
'सीख ले फूलों से गाफिल मुद्दआ-ए-जिंदगी
खुद खिलना ही नहीं चमन को महकाना भी है।'
हमारे साथ खेलने वाले खिलाड़ियों में अनेक के पास प्रतिभा और परिश्रम का अद्भुत संयोग था किंतु उस समय बेहतर प्रशिक्षण और उचित अवसर सबको उपलब्ध नहीं था। आज भी खेल संघों पर खिलाड़ी पदासीन नहीं हैं। शिक्षा-संस्कृति विभाग शिक्षाविदों और संस्कृतिकर्मियों के हाथ में हो,खेल विभाग खिलाड़ियों के हाथ में हो तो देश की धरती कई प्रकार के सोने और हीरे उगलने लगेगी। आज भी भारत माता की स्थिति कमोबेश उस भिखारिन की तरह है जो अपनी जगह पर बैठी हुई बरसों तक भीख मांगती रही किंतु जब मरी तो भिखारिन के बैठने की जगह के नीचे कई प्रकार के वैभव(चांदी, सोने, हीरे) खुदाई में मिले।
क्रिकेट में ही नहीं भारत में हर क्षेत्र में कई प्रकार के वैभव छिपे हुए हैं।उनके प्रतिभा और परिश्रम को बेहतरीन प्रशिक्षण और उचित अवसर नहीं मिलता क्योंकि भारत के शिक्षा-केंद्र प्रतिभा को खोजने और तराशने के मुख्य लक्ष्य से भटक गए हैं-
'कमियों का अहसास भी हो,शक्तियों का विश्वास भी हो
काश!हमारे भारत में छिपे हुए वैभव की तलाश भी हो।'
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹