नजर व दिल पाक हो तो ईद
March 21, 2026🙏🌹ईद मुबारक हो : एक तरफ यह शुभकामना संदेश प्रेषित करने को जी कर रहा है तो दूसरी तरफ ईद को भी मोहर्रम बना देने वाली मानसिकता पर छाती पीटने को भी जी कर रहा है: एक विश्लेषण🙏🌹
संवाद
"नजर व दिल पाक हो तो ईद"
'ईद मुबारक हो' की शुभकामना अपने मित्रों को लिखते समय आज दिल बहुत दुखी है। विश्व खुशी दिवस पर भी संसार से सुख और सुकून छीनने का संकल्प और साहस दिखाया जा रहा है। दिलों के बीच में इतनी दूरियां बढ़ गई हैं कि ईद मुहर्रम बन गया है। गले काटने की भावना रखने वाले आखिर एक दूसरे से गले मिल भी कैसे सकते हैं?
कहां तो प्रेमचंद की कहानी ईदगाह का हामिद अपनी दादी के लिए अपने कुल तीन पैसे से अन्य बच्चों की तरह न तो मिठाई खरीदता है और न खिलौने। वह तो अपनी दादी अमीना के लिए चिमटे खरीदता है ताकि रोटी बनाते समय तवे से उतारने में उनकी उंगलियां जलने से बच जाए। और कहां आज के बड़े-बूढ़े राष्ट्राध्यक्ष मिसाइलों से एक तरफ जीवन के पन्ने पलटते मासूम बच्चियों को मौत की नींद सुला दे रहे हैं तो दूसरी तरफ तेल और गैस के भंडारों को आग लगाकर भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संकट के साथ ऊर्जा संकट भी पैदा कर रहे हैं।
आज सपने भी इतने डरावने हो गए हैं कि सोने का जी नहीं करता। सपने में देखा कि एक मिसाइल आकर घर पर गिरी और सारे लोग मर गए, घर खंडहर में तब्दील हो गया। मैं आकाश की ओर आंखें उठाकर सपने में परमात्मा से पूछ रहा हूं कि मुझे क्यों जिंदा बचा दिया। क्या आंसू पीकर घुट घुट कर मरने के लिए तूने यह जिंदगी दी है! हे निष्ठुर परमात्मा!तू इस जिंदगी को वापस ले। घबराहट में ज्यों ही नींद खुली तो पसीने से तरबतर तन में सीना जेट की गति से भी तेज धड़क रहा था।
अपनी जिंदगी तो हम सबने जी ली लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर इतनी चिंता हो रही है कि कैसी दुनिया उनके लिए छोड़े जा रहे हैं। इसमें चारों तरफ मलबे ही मलबे दिखेंगे जिससे उठती चीत्कारें सुनाई पड़ेंगी, न पीने को शुद्ध पानी बचेगा और न सांस लेने को शुद्ध हवा मिलेगी। चिंता के मारे माथा फटा जा रहा था, तभी अजान की आवाज कानों में पड़ी और ख्याल आया कि आज तो ईद है। बधाई संदेश देने का रस्म तो निभाना ही पड़ेगा। 'ईद मुबारक हो' यह बधाई संदेश भेजता भी जा रहा था और खुद से ही पूछता भी जा रहा था-
'कब तक रहेगी ईद मुहर्रम बनी हुई
आओ कि जश्ने शौक मनाने का वक्त है
नजरों की तरह दिल भी करो फर्शे राह तुम
हुजूर ये उनके बज्म में आने का वक्त है।'
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹